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April 13 2026 05:50 am

बंगाल में अमित शाह का चुनावी शंखनाद, BJP ने जारी किया संकल्प पत्र, सोनार बांग्ला के लिए किए ये बड़े वादे

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News India Live, Digital Desk: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा का चुनावी घोषणा पत्र (संकल्प पत्र) जारी कर राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। कोलकाता में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान शाह ने ममता बनर्जी सरकार पर जमकर निशाना साधा और बंगाल की जनता के लिए लोक-लुभावन वादों की झड़ी लगा दी। शाह ने स्पष्ट किया कि भाजपा का लक्ष्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि 'सोनार बांग्ला' का पुनरुद्धार करना है।

महिलाओं और किसानों के लिए खुली सौगात की पोटली

शाह ने संकल्प पत्र के जरिए बंगाल की आधी आबादी को साधने की बड़ी कोशिश की है। उन्होंने वादा किया कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही, किसानों के लिए 'सम्मान निधि' की राशि बढ़ाने और राज्य में आयुष्मान भारत योजना को तत्काल लागू करने का भरोसा दिया गया है। शाह ने कहा कि जो योजनाएं केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही हैं लेकिन राज्य सरकार उन्हें रोक रही है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हर घर तक पहुंचाया जाएगा।

भ्रष्टाचार और घुसपैठ पर कड़ा प्रहार

अपने संबोधन में अमित शाह ने भ्रष्टाचार और घुसपैठ के मुद्दे पर ममता सरकार को घेरा। उन्होंने संकल्प पत्र में वादा किया कि भाजपा की सरकार बनने के बाद सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर पूरी तरह लगाम लगाई जाएगी। शाह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने की बात कही और कहा कि सरकारी नौकरियों में हुए घोटालों की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों को जेल भेजा जाएगा। उन्होंने बंगाल को 'बम धमाकों' से मुक्त कर 'विकास के पथ' पर लाने का संकल्प दोहराया।

शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर का नया ब्लूप्रिंट

भाजपा के संकल्प पत्र में युवाओं और शिक्षा के लिए भी खास रोडमैप पेश किया गया है। राज्य में नए उद्योगों की स्थापना, आईटी हब का विकास और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे बिंदुओं को प्रमुखता दी गई है। अमित शाह ने दावा किया कि बंगाल की जनता अब परिवर्तन का मन बना चुकी है और 2026 में राज्य में कमल खिलना निश्चित है। इस घोषणा पत्र के जारी होने के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और इसे ममता सरकार के 'लक्ष्मी भंडार' जैसी योजनाओं का जवाब माना जा रहा है।