ईरान ने अमेरिका को याद दिलाई वियतनाम की हार,तंज कसते हुए पूछा क्या फिर शुरू होने वाली है फाइव ओ क्लॉक फॉलीज़
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अब जुबानी जंग ने एक ऐतिहासिक और अपमानजनक मोड़ ले लिया है। ईरान ने अमेरिकी सैन्य धमकियों का मजाक उड़ाते हुए इसकी तुलना 'वियतनाम युद्ध' की उस शर्मनाक हार से की है, जिसने कभी महाशक्ति अमेरिका के अहंकार को चकनाचूर कर दिया था। ईरानी विदेश मंत्रालय और वहां के रणनीतिकारों ने अमेरिका पर तंज कसते हुए 'फाइव ओ क्लॉक फॉलीज़' (Five O'Clock Follies) का जिक्र किया है, जिसने पेंटागन की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है 'फाइव ओ क्लॉक फॉलीज़'? जिससे घबराता है अमेरिका
'फाइव ओ क्लॉक फॉलीज़' शब्द का जन्म वियतनाम युद्ध के दौरान हुआ था। उस समय सैगॉन (अब हो ची मिन्ह सिटी) में अमेरिकी सैन्य अधिकारी हर रोज शाम 5 बजे एक प्रेस ब्रीफिंग करते थे। इस ब्रीफिंग में अमेरिकी सेना अपनी जीत के बढ़ा-चढ़ाकर दावे करती थी और बताती थी कि वे युद्ध जीत रहे हैं। लेकिन हकीकत में, जमीन पर अमेरिकी सैनिक हार रहे थे और भारी नुकसान झेल रहे थे। पत्रकारों ने इन झूठी और हास्यास्पद ब्रीफिंग्स को 'फाइव ओ क्लॉक फॉलीज़' (शाम 5 बजे की मूर्खताएं) नाम दिया था। ईरान का कहना है कि आज भी अमेरिका ईरान के खिलाफ वैसे ही झूठे दावे कर रहा है।
वियतनाम जैसी स्थिति में फंसने की चेतावनी
ईरान के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों ने कहा है कि अमेरिका एक बार फिर इतिहास को दोहराने की गलती कर रहा है। ईरान का तर्क है कि जैसे वियतनाम के जंगलों में अमेरिकी सेना फंस गई थी और अंततः उसे वहां से भागना पड़ा था, वैसा ही हाल ईरान के पहाड़ों और रेगिस्तानों में होगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह वियतनाम से भी अधिक कठिन प्रतिद्वंद्वी साबित होगा। इस तुलना का उद्देश्य अमेरिकी जनता और वहां के नेतृत्व के भीतर वियतनाम युद्ध के पुराने जख्मों को कुरेदना और उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से कमजोर करना है।
डोनाल्ड ट्रंप के 'विनाशकारी' दावों पर पलटवार
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान को 'खत्म' कर देंगे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी मीडिया ने लिखा कि ट्रंप की बातें भी 'फाइव ओ क्लॉक फॉलीज़' जैसी ही हैं, जिनमें सच्चाई कम और दिखावा ज्यादा है। ईरान का मानना है कि अमेरिका केवल 'प्रोपेगेंडा' के दम पर युद्ध जीतना चाहता है, जबकि जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता और 'प्रॉक्सि वारियर्स' (Proxy Warriors) के दम पर अमेरिका को सीधी चुनौती दी है।
मनोवैज्ञानिक युद्ध में कौन आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह बयान बहुत सोच-समझकर दिया गया है। 'वियतनाम' का नाम आते ही अमेरिकी राजनीति में विभाजन शुरू हो जाता है। ईरान जानता है कि अमेरिकी जनता एक और लंबे और खर्चीले युद्ध के पक्ष में नहीं है। ऐसे में 'फाइव ओ क्लॉक फॉलीज़' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर ईरान यह संदेश देना चाहता है कि अमेरिकी सरकार अपनी जनता से सच छुपा रही है और उन्हें एक और विनाशकारी युद्ध की ओर धकेल रही है।