युद्ध के बीच मालामाल हुआ ईरान दुनिया में हाहाकार पर तेहरान की तिजोरी में बरस रहा पैसा, सामने आया तेल के खेल का पूरा सच
News India Live, Digital Desk: दुनिया के नक्शे पर इस वक्त मिडिल ईस्ट (Middle East) सबसे अशांत क्षेत्र बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल के साथ सीधे टकराव और चारों तरफ से लगी पाबंदियों के बावजूद ईरान की अर्थव्यवस्था ने सबको चौंका दिया है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, युद्ध की विभीषिका के बीच ईरान की कमाई घटने के बजाय रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ गई है। तेल निर्यात (Oil Export) के मोर्चे पर ईरान ने ऐसी चाल चली है कि उसकी दैनिक आय अब करोड़ों डॉलर में पहुंच गई है। आखिर प्रतिबंधों के चक्रव्यूह में फंसे होने के बाद भी ईरान इतना पैसा कैसे कमा रहा है? आइए जानते हैं इस 'ब्लैक गोल्ड' के खेल की पूरी इनसाइड स्टोरी।
$13.9 करोड़ प्रतिदिन: कमाई का टूटा रिकॉर्ड
इंटरराष्ट्रीय मीडिया और ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में ईरान की कच्चे तेल से होने वाली कमाई औसतन 13.9 करोड़ डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा फरवरी के 11.5 करोड़ डॉलर प्रति दिन के मुकाबले कहीं ज्यादा है। जानकारों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल और ईरान द्वारा अपनाई गई गुप्त व्यापार नीति ने उसे युद्ध के समय में भी 'फाइनेंशियल सरप्लस' (Financial Surplus) की स्थिति में ला खड़ा किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक इस्तेमाल
ईरान की इस बढ़ती कमाई के पीछे 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) का बड़ा हाथ है। जहां एक ओर दुनिया के अन्य तेल उत्पादक देशों के लिए यह मार्ग चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, वहीं ईरान ने यहाँ "चुनिंदा नियंत्रण" लागू किया है। वह अपने टैंकरों को सुरक्षित निकाल रहा है और साथ ही वहां से गुजरने वाले अन्य चुनिंदा कमर्शियल जहाजों से 'ट्रांजिट फीस' के रूप में मोटी रकम वसूल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान कुछ जहाजों से 20 लाख डॉलर तक की ट्रांजिट फीस वसूल रहा है, जो उसकी आय का एक नया और बड़ा जरिया बन गया है।
चीन बना ईरान का सबसे बड़ा 'संकटमोचक'
अमेरिकी पाबंदियों को धता बताते हुए ईरान ने अपने तेल निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा चीन की ओर मोड़ दिया है। आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में ईरान ने प्रतिदिन लगभग 21 लाख बैरल तेल का निर्यात किया, जिसका एक बड़ा हिस्सा चीन की 'टीपॉट' रिफाइनरियों ने खरीदा। चीन अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारी छूट पर मिल रहे ईरानी कच्चे तेल का स्टॉक कर रहा है। इसके अलावा, ईरान ने समुद्र के बीचों-बीच 'शिप-टू-शिप' (STS) ट्रांसफर के जरिए अपनी पहचान छिपाकर तेल बेचने की तकनीक में भी महारत हासिल कर ली है।
युद्ध के खर्चों को तेल से मिल रही संजीवनी
ईरान की इस बढ़ती आय का सीधा असर युद्ध के मैदान पर दिख रहा है। तेल से मिलने वाले 'पेट्रो-डॉलर्स' का इस्तेमाल तेहरान न केवल अपनी चरमराती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए कर रहा है, बल्कि अपनी सैन्य शक्ति और मिसाइल प्रोग्राम को और अधिक मजबूत करने में भी लगा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें $100 के करीब बनी रहेंगी और चीन जैसे खरीदार सक्रिय रहेंगे, तब तक ईरान को आर्थिक रूप से घुटनों पर लाना मुश्किल होगा।