होर्मुज जलडमरूमध्य पर महासंग्राम,क्या समंदर में भी लगेगा 'टोल टैक्स'? जानें अमेरिका-ईरान की जंग
News India Live, Digital Desk: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा इस संकरे समुद्री रास्ते को बंद करने की धमकी और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर 'टोल टैक्स' (Toll Tax) वसूलने के प्रस्ताव ने वैश्विक हड़कंप मचा दिया है। ज़ी न्यूज़ की विशेष पड़ताल में सामने आया है कि यह लड़ाई केवल भूगोल की नहीं, बल्कि समंदर पर संप्रभुता और खरबों डॉलर की अर्थव्यवस्था पर कब्जे की है।
क्या है विवाद? समंदर में टोल वसूलने की तैयारी
ईरान की संसद में 'स्ट्रेट सिक्योरिटी अरेंजमेंट' नाम का एक विधेयक लंबित है, जिसमें होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से 'नेविगेशन सुरक्षा' के नाम पर शुल्क यानी टोल वसूलने का प्रावधान है। ईरान का तर्क है कि इस रास्ते की सुरक्षा का पूरा बोझ वह अकेले उठाता है, इसलिए यहां से गुजरने वाले देशों को इसका भुगतान करना चाहिए। दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगी इसे 'समुद्री डकैती' और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बता रहे हैं।
असली मालिक कौन? भूगोल बनाम कानून
होर्मुज जलडमरूमध्य की चौड़ाई इसके सबसे संकरे बिंदु पर महज 21 मील (33 किलोमीटर) है।
ईरान और ओमान: भौगोलिक दृष्टि से यह रास्ता ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल (Territorial Waters) के भीतर आता है। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी भी देश की समुद्री सीमा तट से 12 समुद्री मील तक होती है। चूंकि यह रास्ता 24 मील से कम चौड़ा है, इसलिए यहां कोई 'इंटरनेशनल वाटर' नहीं बचता।
ओमान की भूमिका: इस रास्ते का एक बड़ा हिस्सा ओमान के नियंत्रण में भी है, लेकिन ईरान अपनी सैन्य शक्ति और भौगोलिक स्थिति के कारण यहां अपना 'वास्तविक नियंत्रण' (De-facto Control) होने का दावा करता है।
क्या समंदर में टैक्स वसूलना कानूनी है?
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS-1982) के अनुसार, होर्मुज जैसे 'अंतरराष्ट्रीय नौवहन के लिए उपयोग होने वाले जलडमरूमध्य' से जहाजों को 'इनोसेंट पैसेज' (निर्दोष पारगमन) का अधिकार है।
ईरान का पक्ष: ईरान ने UNCLOS संधि पर हस्ताक्षर तो किए हैं, लेकिन इसकी पुष्टि (Ratification) नहीं की है। इसलिए ईरान का तर्क है कि वह इस संधि के सभी नियमों को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
विशेषज्ञों की राय: विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर केवल गुजरने के लिए शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं है। हालांकि, यदि कोई देश विशेष सेवाएं (जैसे मार्ग दिखाना या सफाई) प्रदान करता है, तो वह शुल्क ले सकता है।
दुनिया के लिए क्यों है यह 'जीवन रेखा'?
होर्मुज को दुनिया की 'तेल की नस' कहा जाता है। दुनिया भर में समुद्र के रास्ते होने वाले कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20% से 25% हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
भारत पर असर: भारत के कुल तेल आयात का लगभग 50% इसी रास्ते से आता है। अगर यह रास्ता बंद होता है या यहां टोल लगता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
वैश्विक संकट: वर्तमान युद्ध के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें पहले ही 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। तेल के 150 से अधिक टैंकर इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन चरमरा गई है।
अमेरिका की भूमिका और ट्रंप का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सहयोगियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि होर्मुज की सुरक्षा करना केवल अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने मित्र देशों से "अपना तेल खुद सुरक्षित करने" की बात कही है। अमेरिका का पांचवां बेड़ा (5th Fleet) बहरीन में तैनात है, जो इस रास्ते को खुला रखने के लिए लगातार गश्त कर रहा है। यदि ईरान यहां टोल वसूलने या रास्ता पूरी तरह बंद करने की कोशिश करता है, तो यह सीधे तौर पर अमेरिका के साथ एक बड़े सैन्य टकराव को जन्म दे सकता है।