चॉकलेट और बिस्कुट की जगह अपने बच्चों को दें ये 5 चीज़ें! जंक फ़ूड बिल्कुल न दें
बच्चों के लिए 5 देसी विकल्प: आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में बच्चों की खान-पान की आदतें काफ़ी बदल गई हैं। पश्चिमी भोजन, पैकेटबंद उत्पादों और ज़्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ गया है। इससे बच्चों में मोटापा, दांतों की समस्या और पाचन संबंधी समस्याएँ बढ़ रही हैं। हालाँकि, हमारी भारतीय परंपरा में इसके कई पौष्टिक और स्वादिष्ट विकल्प मौजूद हैं। ये न सिर्फ़ बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, बल्कि उन्हें प्राकृतिक ऊर्जा और संतुष्टि भी प्रदान करते हैं। चॉकलेट, मिठाइयों की बजाय बच्चों को ये पाँच खाद्य पदार्थ दें।
बच्चों के लिए स्वस्थ खान-पान की आदतें हर माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती होती हैं। चॉकलेट, चिप्स, पैकेज्ड जूस और बिस्कुट जैसे जंक फ़ूड उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। ये खाने भले ही स्वादिष्ट लगें, लेकिन इनमें मौजूद चीनी, नमक और हानिकारक वसा बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा डालते हैं। चिंता न करें, हमारे देसी खान-पान में इन जंक फ़ूड के कई स्वस्थ और स्वादिष्ट विकल्प मौजूद हैं। यहाँ 5 देसी विकल्पों के बारे में बताया गया है जो बच्चों को एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मदद करेंगे (बच्चों के लिए इन 5 खाद्य पदार्थों में बदलाव लाएँ)।
1. चॉकलेट की जगह स्थानीय मिठाइयाँ
क्या न करें: चॉकलेट की बजाय घर में बनी मिठाइयाँ एक अच्छा विकल्प हैं। हालाँकि बच्चों को चॉकलेट बहुत पसंद होती है, लेकिन उनमें अतिरिक्त चीनी, कृत्रिम स्वाद और अस्वास्थ्यकर वसा होती है। इससे दाँत खराब हो सकते हैं, शरीर में चर्बी जमा हो सकती है और चीनी की लत लग सकती है।
क्या दें: इसके बजाय, आप रागी-गुड़ के लड्डू, तिल या मेवे के लड्डू या लड्डू दे सकते हैं। ये देसी मिठाइयाँ प्राकृतिक मिठास, कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होती हैं और बच्चों को ऊर्जा देती हैं।
2. फलों के रस के बजाय फल-छाछ
क्या न पिएँ: पैकेज्ड फ्रूट जूस की बजाय ताज़ा फल या छाछ का सेवन करना बेहतर है। बाज़ार में मिलने वाले पैकेज्ड जूस में प्राकृतिक पोषक तत्व कम होते हैं और इनमें चीनी की मात्रा ज़्यादा होती है। फाइबर की कमी के कारण रक्त शर्करा का स्तर बढ़ सकता है।
क्या दें: इसके बजाय, सीधे ताज़े फल खिलाना बेहतर है। छाछ, नारियल पानी या घर का बना जूस शरीर को ठंडक पहुँचाएगा और ज़रूरी विटामिन और मिनरल भी देगा।

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3. चिप्स की जगह स्वस्थ स्नैक्स
क्या न खाएँ: चिप्स और नमकीन के विकल्प के रूप में स्वास्थ्यवर्धक स्नैक्स दिए जा सकते हैं। चिप्स और पैकेटबंद नमकीन में अत्यधिक नमक, तेल और ट्रांस फैट होता है। ये हृदय, गुर्दे और अन्य अंगों के लिए हानिकारक हैं। इनकी लत भी लग सकती है।
क्या परोसें: भुने हुए मखाने, चुरमुरी, भुने हुए छोले या घर पर बने पॉपकॉर्न अच्छे विकल्प हैं। ये कम तेल में बनते हैं और प्रोटीन, फाइबर और ऊर्जा प्रदान करते हैं।
4. कोला और सोडा
क्या न करें: कोला और सोडा की बजाय प्राकृतिक पेय पिएँ। कोला और सोडा जैसे पेय पदार्थों में कोई पोषक तत्व नहीं होते। इसके बजाय, ये दांतों को नुकसान पहुँचा सकते हैं, हड्डियों को कमज़ोर कर सकते हैं और पेट की समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।
क्या दें: इसके बजाय, नींबू का शर्बत, मसालेदार छाछ या नारियल पानी दें, क्योंकि इनमें प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स, विटामिन सी होता है और ये पाचन में मदद करते हैं। ये बच्चों के शरीर को ऊर्जावान बनाए रखते हैं।

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5. बिस्कुट की जगह पौष्टिक स्नैक्स
क्या न खाएँ: बिस्कुट के पौष्टिक विकल्प भी मौजूद हैं। बिस्कुट में मैदा, चीनी, अतिरिक्त तेल और कृत्रिम रसायन होते हैं। ये बच्चे के शरीर को केवल खाली कैलोरी ही देते हैं।
क्या दें: इसके बजाय, आप रागी कुकीज़, तिल, छोले या मसूर की दाल दे सकते हैं। ये प्रोटीन, मिनरल और फाइबर से भरपूर होते हैं। ये बच्चे का पेट भरते हैं और उसके विकास में भी मदद करते हैं।
कुल मिलाकर, माता-पिता द्वारा दिया गया भोजन बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए बेहद ज़रूरी है। पैकेटबंद खाद्य पदार्थों से परहेज़ करके और देसी व प्राकृतिक विकल्प देकर, बच्चे ऊर्जावान, स्वस्थ और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले बनते हैं। अगर छोटी उम्र से ही स्वस्थ आदतें डाली जाएँ, तो वे एक अच्छी जीवनशैली अपना पाएँगे। अगर आप स्वाद के साथ-साथ पोषण का भी ध्यान रखेंगे, तो ये देसी विकल्प बच्चों को ज़रूर पसंद आएंगे। ये शरीर को भी स्वस्थ रखेंगे।