फिलिस्तीन पर नहीं बदला भारत का रुख इजरायल में रक्षा और तकनीक की नई इबारत लिखेंगे पीएम मोदी
News India Live, Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी 2026 को अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक इजरायल यात्रा पर रवाना हो चुके हैं। इस दौरे को लेकर दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि क्या भारत फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपना रुख बदलेगा? हालांकि, विदेश मंत्रालय और उच्च स्तरीय सूत्रों ने साफ कर दिया है कि भारत अपनी 'स्वतंत्र विदेश नीति' पर कायम है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रक्षा (Defence), सुरक्षा और अत्याधुनिक तकनीक में रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर पर ले जाना है।
फिलिस्तीन पर भारत का स्टैंड: संतुलन और सिद्धांत
हाल ही में इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक (West Bank) में किए गए विस्तार की भारत सहित 100 से अधिक देशों ने निंदा की थी। इसके बावजूद पीएम मोदी का यह दौरा भारत की 'डी-हाइफनेशन' (De-hyphenation) नीति का हिस्सा है।
टू-स्टेट सॉल्यूशन: भारत आज भी फिलिस्तीन के लिए एक स्वतंत्र राष्ट्र और 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (Two-state Solution) का समर्थन करता है।
कूटनीतिक संतुलन: भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल के साथ उसके मजबूत रक्षा संबंध फिलिस्तीनी हितों की कीमत पर नहीं हैं। भारत दोनों देशों के साथ अपने रिश्तों को अलग-अलग और स्वतंत्र नजरिए से देखता है।
रक्षा सहयोग: 'मिशन सुदर्शन' और लेजर तकनीक पर फोकस
इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ रक्षा तकनीक का आदान-प्रदान है। भारत अब केवल खरीदार नहीं, बल्कि सह-उत्पादक (Co-producer) बनने की ओर अग्रसर है।
एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल: भारत इजरायल के साथ मिलकर उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने पर चर्चा करेगा। यह भारत के 'मिशन सुदर्शन चक्र' (Mission Sudershan Chakra) के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
लेजर आधारित सुरक्षा: चर्चाओं में इजरायल की मशहूर लेजर-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम (Iron Beam) की तकनीक साझा करना भी शामिल है।
ड्रोन और स्टैंड-ऑफ मिसाइलें: सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हाई-टेक ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों के सह-विकास पर एमओयू (MoU) होने की संभावना है।
यात्रा का पूरा शेड्यूल: नेसेट से लेकर 'याद वाशेम' तक
पीएम मोदी का यह 30 घंटे का दौरा कार्यक्रमों से भरा हुआ है:
नेसेट (Knesset) संबोधन: पीएम मोदी इजरायली संसद 'नेसेट' को संबोधित करेंगे, जो किसी भी भारतीय नेता के लिए एक दुर्लभ सम्मान है।
याद वाशेम (Yad Vashem): प्रधानमंत्री प्रलय स्मारक (Holocaust Memorial) जाकर पीड़ितों को श्रद्धांजलि देंगे।
नेसेट में तिरंगा: पीएम मोदी के स्वागत में इजरायली संसद को भारतीय तिरंगे के रंगों से रोशन किया गया है।
द्विपक्षीय वार्ता: पीएम नेतन्याहू के साथ प्राइवेट डिनर और डेलिगेशन लेवल की वार्ता होगी, जिसमें एआई (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और कृषि पर चर्चा होगी।
शशि थरूर और विपक्ष के सवाल
देश के भीतर इस दौरे को लेकर राजनीति भी गर्म है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर और जयराम रमेश ने इस दौरे की टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि जब गाजा में संघर्ष जारी है, ऐसे में यह दौरा फिलिस्तीनी मुद्दे पर भारत की पारंपरिक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, सरकार का मानना है कि भारत के राष्ट्रीय हित और सुरक्षा सर्वोपरि हैं।