शहरों पर मंडरा रहा है खतरा, पर भारत की असली ताकत तो अब गांवों में
एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के भारी-भरकम टैक्स (टैरिफ) का डर देश के बड़े-बड़े बिजनेसमैन को सता रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ भारत के गांव और छोटे कस्बे देश की अर्थव्यवस्था के नए 'हीरो' बनकर उभर रहे हैं. यह वो कहानी है जिसे बड़ी-बड़ी बिजनेस रिपोर्ट्स में नहीं, बल्कि गांव की दुकानों पर बिक रहे बिस्किट के पैकेट और बन रहे नए घरों में देखा जा सकता है.
यह कहानी है उस असली भारत की, जो महानगरों की ऊंची इमारतों में नहीं, बल्कि देश की 90 करोड़ की आबादी वाले गांवों में बसता है.
शहर डरे हुए हैं, पर गांव खुलकर कर रहे हैं खर्च
इसकी सीधी-सी वजह है पैसा. कम महंगाई और अच्छी फसल की उम्मीद ने गांवों में लोगों की जेब में पैसा बढ़ाया है, और वे अब खर्च करने से कतरा नहीं रहे. नीलसन आईक्यू जैसी बड़ी रिसर्च कंपनी के आंकड़े बताते हैं कि पिछले डेढ़ साल से गांवों की खपत लगातार शहरों को पछाड़ रही है.
यही कारण है कि बिस्किट बनाने वाली ब्रिटानिया से लेकर फेविकोल बनाने वाली पिडिलाइट तक, हर बड़ी कंपनी कह रही है कि उनकी असली ग्रोथ अब शहरों से नहीं, बल्कि गांवों से आ रही है. हाल ही में भारत की जीडीपी ने जो शानदार रफ्तार पकड़ी है, उसके पीछे सबसे बड़ा हाथ गांवों में बढ़ी इसी खरीदारी का है.
तो खतरा कहाँ है?
खतरा उन उद्योगों पर है जो अपना माल विदेशों में बेचते हैं, खासकर अमेरिका को. ट्रंप ने भारतीय सामान, जैसे कपड़े और गहनों पर, आयात शुल्क को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया है. इन उद्योगों की ज़्यादातर फैक्ट्रियां शहरों के आसपास हैं, इसलिए डर भी वहीं ज़्यादा है.
कंपनियां कैसे बन रही हैं 'गांव की दोस्त'?
कंपनियों ने भी समझ लिया ਹੈ ਕਿ भविष्य की असली कमाई गांवों में ही है.
- पिडिलाइट: यह कंपनी अब 12,000 से कम आबादी वाले छोटे कस्बों में नए डीलर बना रही है, ब्रांडेड स्टोर खोल रही है और यहाँ तक कि मोबाइल वैन के जरिए गांवों तक पहुंच रही है
- ब्रिटानिया: कंपनी के MD वरुण बेरी का कहना है कि उनकी ग्रोथ का राज गांवों पर उनका फोकस ही ਹੈ.
- लाहौरी जीरा: इस कंपनी की कहानी तो और भी दिलचस्प है. आर्चियन फूड्स के को-फाउंडर निखिल डोडा बताते हैं कि उनका 10 रुपये वाला ड्रिंक 'लाहौरी जीरा' गांवों में सुपरहिट है. वे छोटे दुकानदारों की एक अनोखी समस्या का हल भी निकालते हैं - जिन दुकानों पर फ्रिज नहीं होता, उन्हें वे खास इंसुलेटेड बॉक्स देते हैं ताकि ड्रिंक ठंडा रहे.
सरकार भी दे रही है साथ
इस ग्रामीण क्रांति को सरकार का भी साथ मिल रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में टैक्स में कटौती की घोषणा की ਹੈ ताकि अमेरिकी टैरिफ के असर को कम किया जा सके और लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए और पैसा आए.
साफ शब्दों में कहें तो, जब दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं लड़खड़ा रही हैं और शहरों पर डर के बादल हैं, तब भारत के गांव उम्मीद की एक नई रोशनी बनकर चमक रहे हैं. असली 'इंडिया स्टोरी' अब महानगरों की ऊंची इमारतों में नहीं, बल्कि गांवों की कच्ची-पक्की गलियों में लिखी जा रही है.