मैदान से पहले उग्रवादियों ने घेरा राजस्थान के 24 खिलाड़ियों की आपबीती, क्या सुरक्षित लौट पाएंगे अपने घर?
News India Live, Digital Desk : इंसान जब अपने घर से दूर किसी दूसरी जगह खेलने या अपना हुनर दिखाने जाता है, तो उसके मन में एक ही सपना होता है जीत का परचम लहराना। लेकिन राजस्थान (जयपुर) के कुछ खिलाड़ियों के लिए यह सफर एक बुरे सपने में बदल गया। आप और हम तो बस टीवी पर खबरों में सुनते हैं कि मणिपुर में हालात खराब हैं, लेकिन उन खिलाड़ियों पर क्या गुजरी होगी, जिन्होंने अपनी आँखों के सामने बंदूकें देखीं और बंधक बन गए।
घटना मणिपुर की है, जहाँ राजस्थान की वुशू और कराटे टीम एक नेशनल प्रतियोगिता के लिए पहुँची थी। ये खिलाड़ी बस अपनी जीत की लय में थे कि अचानक रास्ते में कुछ हथियारबंद उग्रवादियों ने उनका रास्ता रोक लिया। कल्पना कीजिए, पहाड़ी रास्ता, सुनसान सड़क और सामने हथियार लेकर खड़े लोग।
खिलाड़ियों के साथ क्या-क्या हुआ?
खबरों की मानें तो खिलाड़ियों को घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया। डरे-सहमे खिलाड़ियों के पास जो कुछ भी था चाहे वह उनका मोबाइल फोन हो, घर से मिला खर्च का पैसा या अन्य जरूरी सामान सब कुछ उग्रवादियों ने लूट लिया। खिलाड़ियों ने अपनी आपबीती सुनाई कि वे बस जान बचाने की गुहार लगाते रहे। उग्रवादियों का रवैया ऐसा था कि किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि अगले पल क्या होगा।
इंतजार है घर वापसी का
जब ये खबर राजस्थान पहुँची, तो खिलाड़ियों के परिवार वालों की साँसें अटक गईं। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बस यही चाहते हैं कि उनके बच्चे किसी तरह सही-सलामत वापस आ जाएँ। हालाँकि, राहत की बात ये है कि अब खिलाड़ी सुरक्षित स्थान पर हैं और प्रशासन उनकी मदद में जुटा है, लेकिन वो खौफ जो उन्होंने देखा है, शायद वो ज़िंदगी भर उनका पीछा न छोड़े।
अब आगे क्या?
राजस्थान सरकार और खेल मंत्रालय इस मामले को गंभीरता से देख रहे हैं। माँग उठ रही है कि अशांत इलाकों में जाने वाली टीमों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए जाते? मणिपुर जैसे संवदेनशील राज्य में नेशनल लेवल की टीमों को बिना कड़ी सुरक्षा के छोड़ना वाकई बड़े सवाल खड़े करता है।
फिलहाल, पूरा देश उन खिलाड़ियों की सुरक्षित वापसी की दुआ कर रहा है। यह वाकया हमें याद दिलाता है कि सुरक्षा केवल मैदान पर नहीं, बल्कि उस मैदान तक पहुँचने वाले रास्तों पर भी उतनी ही जरूरी है।