वोट का हक या सत्ता का दांव? राजस्थान में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के गंभीर आरोपों ने बढ़ाई राजनीतिक

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News India Live, Digital Desk : लोकतंत्र में 'वोट' ही वह सबसे बड़ी ताकत है जिससे एक आम आदमी अपनी सरकार चुनता है। लेकिन सोचिए, अगर आप पोलिंग बूथ पर पहुँचें और आपको पता चले कि आपका नाम ही लिस्ट से गायब है? राजस्थान में इस समय कुछ ऐसा ही डर और गुस्से का माहौल है। राज्य में होने वाले आगामी चुनावों से पहले वोटर लिस्ट को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है, जो अब सीधे हाईकोर्ट (High Court) की चौखट तक पहुँच गई है।

दरअसल, राजस्थान कांग्रेस ने राज्य की मौजूदा वोटर लिस्ट में भारी गड़बड़ी होने के आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि वोटर लिस्ट में न केवल कई फर्जी नाम जोड़ दिए गए हैं, बल्कि विपक्षी पार्टियों को वोट देने वाले लोगों के नाम भी लिस्ट से जानबूझकर हटा दिए गए हैं।

क्यों बढ़ा ये मामला और क्या हैं आरोप?
किसी भी चुनावी मैदान में हार-जीत से पहले वोटर लिस्ट का साफ़-सुथरा होना बहुत जरूरी है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य की कई विधानसभा क्षेत्रों में वोटर लिस्ट में बहुत बड़ा फेरबदल (Voter List Tampering in Rajasthan) हुआ है। शिकायत यह है कि हजारों की तादाद में एक जैसे फोटो वाले वोटर मौजूद हैं और प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। जब निर्वाचन आयोग से उनकी शिकायत नहीं बनी, तो अब कांग्रेस ने कानूनी रास्ता चुनने का फैसला किया है।

आम जनता के मन में भी है फिक्र
अक्सर देखा जाता है कि एक ही घर के कुछ लोगों का नाम एक लिस्ट में होता है और बाकी का दूसरी जगह। इस बार शिकायतें इससे भी गंभीर हैं। लोगों को डर है कि कहीं उनके लोकतांत्रिक अधिकार के साथ कोई राजनीतिक खेल तो नहीं हो रहा? अगर बड़ी तादाद में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, तो यह सीधे तौर पर चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

आगे का रास्ता क्या है?
हाईकोर्ट अब इस मामले की सुनवाई करेगा। चुनाव के करीब होने की वजह से कोर्ट का फैसला और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया राजस्थान की पूरी राजनीति की दिशा बदल सकती है। अगर कोर्ट ने लिस्ट को दोबारा जांचने या सुधारने का आदेश दिया, तो इससे न केवल सरकारी तंत्र पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि चुनावी तैयारियों में भी बड़ी देरी हो सकती है।

कुल मिलाकर, राजस्थान में वोट की ये लड़ाई अब सड़कों से निकलकर न्याय के तराजू तक पहुँच चुकी है। आने वाले दिन ये तय करेंगे कि लिस्ट में 'गड़बड़ी' वाकई हुई है या ये सिर्फ राजनीतिक पैंतरेबाजी का हिस्सा है।