BREAKING:
April 03 2026 01:49 am

BRICS Meeting 2026: नई दिल्ली में एक ही टेबल पर बैठेंगे दुश्मन देश, ईरान की इस मांग से भारत की बढ़ी कूटनीतिक टेंशन

Post

News India Live, Digital Desk: दुनियाभर की निगाहें एक बार फिर भारत की कूटनीति पर टिकने वाली हैं। 14 और 15 मई को नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की एक बेहद अहम बैठक होने जा रही है। इस बार बैठक की सबसे खास बात यह है कि इसकी अध्यक्षता भारत कर रहा है और इसमें ईरान व संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी शामिल होने जा रहे हैं। दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बात यह है कि भारत की अगुवाई में हो रही इस बैठक में कम से कम तीन ऐसे देश शिरकत करेंगे, जो मौजूदा समय में एक-दूसरे के साथ गहरे संघर्ष में उलझे हुए हैं। कूटनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस महाबैठक के जरिए पश्चिम एशिया में धधक रही युद्ध की आग को शांत करने का रास्ता भी निकल सकता है।

भारत की मेजबानी, दिग्गजों का लगेगा जमावड़ा भारत जल्द ही 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने जा रहा है, जिसकी तैयारियों के सिलसिले में मई में यह विदेश मंत्रियों की बैठक बुलाई गई है। भारत सरकार की ओर से रूस, चीन, ईरान, यूएई, ब्राजील, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका को बुलावा भेजा जा चुका है। रूस की तरफ से यह पुष्टि भी कर दी गई है कि उनके विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव इस महत्वपूर्ण बैठक में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं।

ईरान की मांग ने फंसाया कूटनीतिक पेंच इस बैठक से पहले ही ईरान ने एक ऐसी मांग रख दी है, जिससे भारत के लिए कूटनीतिक संतुलन साधना मुश्किल हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, ईरान चाहता है कि ब्रिक्स का अध्यक्ष होने के नाते भारत एक औपचारिक बयान जारी करे, जिसमें अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों की कड़ी निंदा की जाए। अब भारत के लिए मुश्किल यह है कि अमेरिका और इजरायल दोनों के साथ उसके बेहद मजबूत और रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में ईरान की यह मांग नई दिल्ली के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन गई है।

साझा रुख अपनाना भारत के लिए बड़ी चुनौती पश्चिम एशिया के हालात पर ब्रिक्स देशों को एक मंच पर लाना आसान नहीं है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि इस मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच एक साझा राय बनाना काफी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि ब्रिक्स के कुछ सदस्य सीधे तौर पर इस संघर्ष का हिस्सा हैं, इसलिए सभी की राय अलग-अलग है। हालांकि, भारत अध्यक्ष के रूप में सभी देशों के बीच सहमति बनाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।

अब 48 फीसदी आबादी की आवाज है ब्रिक्स ब्रिक्स अब सिर्फ पांच देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का समूह नहीं रह गया है। 2024 में इसका विस्तार करते हुए इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई को शामिल किया गया था। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया को भी इसका हिस्सा बना लिया गया। आज के समय में ब्रिक्स देशों की कुल आबादी लगभग 3.9 अरब है, जो पूरी दुनिया की कुल जनसंख्या का करीब 48 प्रतिशत हिस्सा है। यही वजह है कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में इस समूह का दबदबा लगातार बढ़ रहा है।