India US Relations : जब मोदी ने नहीं उठाए ट्रंप के 4 फ़ोन कॉल्स, जानिए क्या थी वो बड़ी वजह

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News India Live, Digital Desk: India US Relations :  भारत और अमेरिका के रिश्ते यूं तो काफी मज़बूत माने जाते हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर तलवारें खिंच गई थीं. ये वो दौर था जब अमेरिका की कमान डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में थी और भारत में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री थे. ट्रंप ने "अमेरिका फर्स्ट" की नीति अपनाते हुए कई देशों से आने वाले सामान पर भारी टैक्स यानी टैरिफ लगा दिया था, जिसमें भारत भी शामिल था. लेकिन जब दबाव बढ़ाने की कोशिश हुई, तो प्रधानमंत्री मोदी ने भी साफ़ कर दिया कि भारत अपने हितों से कोई समझौता नहीं करेगा.

यह पूरा मामला तब गरमाया जब ट्रंप प्रशासन ने भारत से आने वाले स्टील और एल्यूमीनियम जैसे कई प्रोडक्ट्स पर 25% का टैरिफ लगा दिया. बात यहीं नहीं रुकी, बाद में भारत के रूस से तेल खरीदने जैसे मुद्दों को आधार बनाकर इस टैरिफ को बढ़ाकर 50% तक कर दिया गयाअमेरिका का मकसद था कि इस दबाव के आगे भारत झुक जाएगा.

लेकिन मोदी सरकार ने इसके जवाब में एक सधा हुआ और कड़ा रुख़ अपनाया. भारत ने भी अमेरिका से आने वाले 28 आइटम्स पर जवाबी टैरिफ लगा दिया. इसमें सेब, बादाम और अखरोट जैसे प्रोडक्ट्स शामिल थे. ये एक सीधा संदेश था कि अगर हमारे हितों को नुकसान पहुंचाया जाएगा, तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे.

ट्रंप प्रशासन की तरफ से लगातार दबाव बनाने की कोशिशें होती रहीं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, तनाव के उस दौर में प्रधानमंत्री मोदी ने कथित तौर पर ट्रंप के कई फोन कॉल्स तक को नज़रअंदाज़ कर दिया था. मोदी ने साफ़ तौर पर कहा था कि किसानों और छोटे उद्यमियों के हितों की रक्षा के लिए भारत कोई भी "भारी कीमत" चुकाने को तैयार है. उन्होंने देशवासियों से "मेड इन इंडिया" प्रोडक्ट्स को प्राथमिकता देने की अपील भी की, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी दबावों से बचाया जा सके.

सरकार के इस कड़े रुख का असर भी हुआ. जहां एक तरफ अमेरिकी टैरिफ से भारत के कपड़ा, जेम्स-ज्वेलरी और लेदर जैसे उद्योगों को नुकसान उठाना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ भारत ने यह भी साफ़ कर दिया कि वो किसी के दबाव में आकर अपनी विदेश और व्यापार नीति तय नहीं करेगा. भारत ने अमेरिका को यह संदेश देने में कामयाबी हासिल की कि दोस्ती अपनी जगह है, लेकिन देश का हित सबसे ऊपर है.