टेस्ट क्रिकेट में पिछड़ रहा है भारत? राहुल द्रविड़ ने बताया क्यों घर में शेर कहलाने वाली टीम अब हो रही है ढेर

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News India Live, Digital Desk : भारतीय क्रिकेट के लिए यह समय विरोधाभासों से भरा है। एक तरफ भारत टी20 की 'सुपरपावर' बनकर उभरा है और अगले महीने होने वाले टी20 वर्ल्ड कप में खिताब बचाने का प्रबल दावेदार है। वहीं दूसरी तरफ, रेड-बॉल क्रिकेट यानी टेस्ट में टीम इंडिया का ग्राफ तेजी से गिरा है।

लगभग 12 वर्षों तक घरेलू मैदानों पर अजेय रहने वाली भारतीय टीम ने अपनी पिछली तीन घरेलू टेस्ट सीरीज में से दो गंवा दी हैं न्यूजीलैंड (0-3) और दक्षिण अफ्रीका (0-2)। आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की अंक तालिका में भारत अब छठे स्थान पर खिसक गया है।

आखिर टीम इंडिया के इस पतन का कारण क्या है? पूर्व मुख्य कोच और दिग्गज बल्लेबाज राहुल द्रविड़ ने इसके पीछे के तीन सबसे बड़े कारणों का खुलासा किया है।

1. रेड-बॉल अभ्यास के लिए समय की कमी

द्रविड़ के अनुसार, तीनों फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों के लिए टी20 से अचानक टेस्ट मोड में आना सबसे बड़ी चुनौती है।

बड़ी समस्या: खिलाड़ी अक्सर टेस्ट मैच से केवल 3-4 दिन पहले पहुंचते हैं। कई बार तो खिलाड़ियों ने पिछले 4-5 महीनों से लाल गेंद को छुआ तक नहीं होता।

कौशल का अभाव: टर्निंग ट्रैक या सीमिंग विकेट पर घंटों तक बल्लेबाजी करने के लिए जिस कौशल और धैर्य की जरूरत होती है, वह अभ्यास के बिना हासिल करना मुश्किल है।

2. फ्रेंचाइजी क्रिकेट और बदलता दौर

द्रविड़ ने अपने दौर की तुलना आज के दौर से करते हुए कहा कि अब खिलाड़ियों के पास अपनी स्किल्स (Skills) सुधारने का समय नहीं है।

द्रविड़ का दौर: "मेरे समय में केवल दो फॉर्मेट थे और फ्रेंचाइजी क्रिकेट नहीं था। हमें टेस्ट सीरीज से पहले पूरा एक महीना अभ्यास के लिए मिलता था।"

शुभमन गिल का अनुभव: वर्तमान कप्तान शुभमन गिल ने भी हाल ही में बेहतर शेड्यूलिंग की वकालत की थी। द्रविड़ ने गिल का उदाहरण देते हुए कहा कि तीनों फॉर्मेट खेलने वाले युवाओं के लिए टेस्ट के लिए खुद को तैयार करना बहुत कठिन हो गया है।

3. WTC का दबाव और 'रिजल्ट ओरिएंटेड' पिचें

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के आने से अब हर मैच के पॉइंट्स की कीमत बढ़ गई है। इसी कारण टीमें अब ऐसी पिचें बनवा रही हैं जहाँ नतीजा निकल सके।

गेंदबाजों को फायदा: घरेलू सीरीज जीतने के दबाव में पिचें ऐसी बनाई जा रही हैं जो बल्लेबाजों के बजाय गेंदबाजों को बहुत ज्यादा मदद करती हैं।

द्रविड़ का तर्क: “आज केवल सीरीज जीतना काफी नहीं है, हर मैच जीतना जरूरी है। इसी दबाव में हम ऐसी पिचों पर खेल रहे हैं जहाँ बल्लेबाजी करना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, और यह केवल भारत में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा है।”