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April 09 2026 06:53 am

महायुद्ध के बीच एक्शन में भारत! ट्रंप की खौफनाक धमकी के बाद जयशंकर ने ईरान, कतर और UAE के नेताओं से की बात, जानिए इनसाइड स्टोरी

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पश्चिम एशिया में जारी विनाशकारी युद्ध और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को लेकर मचे हाहाकार के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक ताकत झोंक दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को दी गई पावर प्लांट तबाह करने की धमकी के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट बेहद गहरा गया है। इस महासंकट के बीच, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और शांति बहाली के लिए रविवार (5 अप्रैल) को ईरान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के शीर्ष नेताओं से फोन पर अहम बातचीत की है।

ईरान, कतर और UAE के साथ जयशंकर की 'डिप्लोमेसी'

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस कूटनीतिक कदम की जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्हें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का फोन आया था, जिसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने भी पुष्टि की है कि दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर बात हुई। इसके अलावा, जयशंकर ने कतर के प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम अल थानी और यूएई के उपप्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी फोन पर पश्चिम एशिया के तेजी से बिगड़ते हालातों पर गहन चर्चा की। इस पूरी कूटनीतिक बातचीत के केंद्र में वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति (Global Energy Supply) पर युद्ध का असर प्रमुखता से शामिल रहा।

ट्रंप का अल्टीमेटम और होर्मुज स्ट्रेट का विवाद

भारत की ओर से यह कूटनीतिक सक्रियता ऐसे बेहद नाजुक समय में सामने आई है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक सख्त अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने खुलेआम चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने समुद्री व्यापार के लिए अहम 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को तुरंत नहीं खोला, तो उसके सभी पुलों और बिजली संयंत्रों को खाक में मिला दिया जाएगा। आपको बता दें कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित इस संकरे समुद्री मार्ग को ईरान द्वारा ब्लॉक किए जाने के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में जबरदस्त आग लगी हुई है।

भारत के लिए क्यों बज रही है खतरे की घंटी?

इस पूरे विवाद में भारत की सक्रियता की एक बड़ी वजह उसकी अपनी जरूरतें हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस) का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया के देशों से ही आयात करता है। नई दिल्ली का मानना है कि अगर इस अहम समुद्री मार्ग की नाकेबंदी लंबी खिंचती है, तो भारत सहित कई देशों की ईंधन और उर्वरक (Fertilizer) सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी खतरे को भांपते हुए भारत पिछले कई हफ्तों से शांति बहाली और होर्मुज स्ट्रेट से निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है।

ईरान ने निभाई दोस्ती, भारत को दी बड़ी छूट

पश्चिम एशिया के इस भयंकर तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर यह है कि ईरान ने अपनी पुरानी कूटनीतिक दोस्ती का मान रखा है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारत समेत उसके अन्य मित्र देशों के जहाजों को इस नाकेबंदी के दौरान भी इस जलमार्ग से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है। इसके बावजूद, भारत की कूटनीति का मुख्य फोकस यही है कि यह संघर्ष जल्द से जल्द समाप्त हो ताकि वैश्विक व्यापार बिना किसी रुकावट के फिर से अपनी पटरी पर लौट सके और भारत पर महंगाई का कोई दबाव न आए।