ट्रम्प की टैरिफ धमकी के बीच भारत और अमेरिका ने मिलाया हाथ, 7,995 करोड़ की डील पक्की

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News India Live, Digital Desk : अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी अजीब चीज है। एक तरफ अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) भारत और ब्रिक्स देशों पर 100% टैरिफ (टैक्स) लगाने की धमकी दे रहे हैं, और दूसरी तरफ भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों की गाड़ी बुलेट ट्रेन की रफ़्तार से दौड़ रही है।

इस "टैरिफ वॉर" के शोर-शराबे के बीच, भारत ने चुपचाप अमेरिका के साथ एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण समझौता कर लिया है। खबर पक्की है कि भारत ने अमेरिका के साथ करीब 7,995 करोड़ रुपये (लगभग 1 अरब डॉलर) की एक नई डिफेंस डील साइन की है।

आइये आसान भाषा में समझते हैं कि ये पैसा कहाँ खर्च होगा और इससे हमारी नौसेना (Navy) को क्या फायदा मिलेगा।

किस चीज़ की हुई है डील? (The Romeo Deal)

यह डील इंडियन नेवी के सबसे ताकतवर हेलिकॉप्टरों में से एक—MH-60R सी-हॉक (Seahawk), जिसे प्यार से 'रोमियो' भी कहा जाता है, के लिए है।
भारत ने कुछ साल पहले अमेरिका से 24 ऐसे हेलिकॉप्टर खरीदे थे। अब ये मशीनें पुरानी न हों और हमेशा जंग के लिए तैयार रहें, इसके लिए उनके रख-रखाव (Maintenance), स्पेयर पार्ट्स और सपोर्ट की जरूरत थी।

यह 7,995 करोड़ रुपये की डील इसी काम के लिए है। इसे परफॉरमेंस बेस्ड लॉजिस्टिक्स (PBL) कहा जा रहा है। इसका मतलब है कि अब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि हमारे ये 'रोमियो' हेलिकॉप्टर कभी खराब न पड़े रहें और हमेशा आसमान (या समंदर) में गरजने के लिए फिट रहें।

क्यों खास हैं ये हेलिकॉप्टर?

अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ रख-रखाव पर इतना पैसा क्यों? तो जनाब, यह कोई मामूली हेलिकॉप्टर नहीं है।

  • यह 'पनडुब्बी शिकारी' (Submarine Hunter) है। समंदर की गहराई में छिपी दुश्मन (खासकर चीन या पाकिस्तान) की पनडुब्बियों को ढूंढकर उन्हें नष्ट करने में इसका कोई सानी नहीं है।
  • यह रात के अंधेरे में, ख़राब मौसम में, कहीं भी ऑपरेशन कर सकता है।
  • ऐसे में इनका 24x7 एक्टिव रहना भारत की सुरक्षा के लिए बहुत जरुरी है।

सही समय पर मास्टरस्ट्रोक

इस डील की टाइमिंग बहुत दिलचस्प है। दुनिया भर में चर्चा थी कि डोनाल्ड ट्रम्प के आने के बाद भारत और अमेरिका के रिश्ते शायद थोड़े खट्टे हो जाएं, क्योंकि ट्रम्प ने व्यापार पर कड़ा रुख अपनाने की बात कही है।
लेकिन इस डील ने साबित कर दिया है कि कारोबार अपनी जगह है और रक्षा (Defense) अपनी जगह। अमेरिका भी जानता है कि एशिया में चीन को काउंटर करने के लिए उसे भारत की सख्त जरूरत है। इसीलिए, धमकियां भले ही ट्विटर (X) पर दी जा रही हों, लेकिन टेबल के नीचे फाइलें पास हो रही हैं।

नेवी को मिलेगी नई ताकत

इस समझौते से भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ जाएगी। जब आपके पास दुनिया के सबसे बेहतरीन हथियार हों और उनके रख-रखाव की पूरी गारंटी हो, तो सैनिक का मनोबल सातवें आसमान पर होता है।
तो ट्रम्प जी भले ही टैरिफ का डंडा दिखाएं, लेकिन दोस्ती की डोर अभी भी मजबूत है!