ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: फेडरल गवर्नर लिसा कुक को नहीं हटा पाएंगे राष्ट्रपति, जानें क्या है पूरा विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा कानूनी अवरोध पैदा हो गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप के फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक को बर्खास्त करने के प्रयास पर रोक लगा दी है। 5-4 के बहुमत से आए इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन की कार्यकारी शक्तियों को एक बड़ा झटका दिया है। यह पहली बार है जब 1913 में फेडरल रिजर्व की स्थापना के बाद किसी राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय बैंक के किसी उच्च अधिकारी को हटाने की कोशिश को सर्वोच्च अदालत ने सिरे से खारिज किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ट्रंप प्रशासन की अपील
सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ ने ट्रंप प्रशासन की उस याचिका को ठुकरा दिया, जिसमें कुक को बर्खास्त करने से रोकने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। जिला न्यायाधीश जिया कॉब ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि बिना उचित नोटिस और सुनवाई के लिसा कुक को हटाना 'उचित प्रक्रिया' (Due Process) का सीधा उल्लंघन है। इसके बाद कोलंबिया सर्किट अपील अदालत ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगाकर अंतिम रूप दे दिया है।
क्या है विवाद की जड़?
अगस्त 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए कुक को बर्खास्त करने का पत्र जारी किया था। उन्होंने लिसा कुक पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, जिसे कुक और उनके समर्थकों ने पूरी तरह खारिज किया है। लिसा कुक, जो फेडरल रिजर्व की पहली अश्वेत महिला गवर्नर हैं, का कहना है कि यह कार्रवाई वास्तव में मौद्रिक नीति को लेकर चल रहे वैचारिक मतभेदों के कारण की जा रही है। उनका कार्यकाल 2038 तक निर्धारित है और उन्हें 2022 में नियुक्त किया गया था। इस फैसले के बाद ट्रंप ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत की कार्यवाही को 'पूरी तरह प्रक्रियात्मक' करार दिया है।
फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और ट्रंप का रुख
दुनिया के सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद से ही फेडरल रिजर्व उनके निशाने पर रहा है। इससे पहले वे फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के कार्यकाल के दौरान भी अपनी नाराजगी जता चुके हैं। केविन वॉर्श के नए चेयरमैन बनने के बाद भी ट्रंप प्रशासन और फेडरल रिजर्व के बीच खींचतान जारी है। लिसा कुक के मामले में आए इस फैसले ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से केंद्रीय बैंक के अधिकारियों को पद से नहीं हटा सकते, जो अमेरिकी संस्थागत लोकतंत्र के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।