दिसंबर में अमेरिका जाएंगे पीएम मोदी! डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी सर्जियो गोर का बड़ा दावा, जानें बार-बार क्यों आ रहा है वॉशिंगटन से बुलावा
भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्ते एक नए और बेहद मजबूत दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इसी बीच वैश्विक राजनीतिक गलियारों से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे खास और भरोसेमंद सिपहसालार सर्जियो गोर ने दावा किया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी दिसंबर महीने में अमेरिका की हाई-प्रोफाइल यात्रा पर जा सकते हैं। इस दावे के बाद से ही नई दिल्ली से लेकर वॉशिंगटन तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर अमेरिकी प्रशासन की तरफ से पीएम मोदी को बार-बार यह खास न्यौता क्यों भेजा जा रहा है।
आखिर क्यों पीएम मोदी को बार-बार न्यौता भेज रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन की तरफ से भारत को मिल रही यह असाधारण प्राथमिकता दोनों देशों के बीच के गहरे आपसी भरोसे को दर्शाती है। डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की निजी केमिस्ट्री जगजाहिर है, लेकिन इस बार का बुलावा सिर्फ दोस्ती तक सीमित नहीं है। अमेरिका इस समय वैश्विक मंच पर कई बड़े भू-राजनीतिक (Geopolitical) बदलावों से गुजर रहा है, जहां उसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर भारत के मजबूत साथ की बेहद जरूरत है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन साल के अंत तक पीएम मोदी के साथ एक बेहद अहम और निर्णायक बैठक करना चाहता है।
रक्षा सौदों से लेकर व्यापार तक इन बड़े मुद्दों पर टिकी हैं दुनिया की नजरें
अगर पीएम मोदी की यह दिसंबर यात्रा फाइनल होती है, तो यह कई मायनों में ऐतिहासिक साबित होने वाली है। इस संभावित दौरे के दौरान दोनों महाशक्तियों के बीच कई अरब डॉलर के अत्याधुनिक रक्षा सौदों, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (iCET) की साझेदारी और इंडो-पैसिफिक रीजन में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने जैसे गंभीर मुद्दों पर अंतिम मुहर लग सकती है। इसके साथ ही, अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच और दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए भी इस बैठक को बेहद मील का पत्थर माना जा रहा है, जिसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ेगा।
नई दिल्ली और वॉशिंगटन की जुगलबंदी से बढ़ी ड्रैगन की बेचैनी
सर्जियो गोर के इस बड़े खुलासे और भारत-अमेरिका की इस बढ़ती नजदीकी ने पड़ोसी देश चीन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) के दौर में कूटनीतिक जानकार मान रहे हैं कि दिसंबर का यह संभावित दौरा वैश्विक राजनीति का नया रुख तय करेगा। भारत जिस तरह से वैश्विक सप्लाई चेन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है, उसे देखते हुए अमेरिका भारत को अपने सबसे मजबूत और स्थायी साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पीएमओ (PMO) की तरफ से इस यात्रा को लेकर आधिकारिक तौर पर क्या तारीखें सामने आती हैं।