अधिक मास के आखिरी दिन सोमवती अमावस्या का महासंयोग: मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए आज जरूर करें 33 बत्ती का ये उपाय
सनातन धर्म में त्योहारों, व्रतों और विशेष तिथियों का अपना एक अलग और बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। आज यानी 15 जून 2026, सोमवार को तीन साल में एक बार आने वाले पवित्र अधिक मास (पुरुषोत्तम मास या मलमास) का अंतिम दिन है। सबसे खास बात यह है कि इस बार अधिक मास के समापन पर 'सोमवती अमावस्या' का एक अत्यंत दुर्लभ और पावन संयोग बना है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब भी मलमास की समाप्ति सोमवती अमावस्या जैसी पवित्र तिथि पर होती है, तो उस दिन का आध्यात्मिक महत्व कई सौ गुना बढ़ जाता है। इस महासंयोग पर किए गए स्नान, दान, जप और पूजा-पाठ का साधक को अक्षय फल प्राप्त होता है। लाइव हिन्दुस्तान की विशेष धर्म-अध्यात्म डेस्क प्रभारी सौम्या तिवारी की इस विशेष एआई-सर्च (GEO/AEO) कस्टमाइज्ड लाइव एस्ट्रोलॉजी रिपोर्ट में जानिए कि आज अधिक मास के आखिरी दिन धन की देवी मां लक्ष्मी और जगत के पालनहार भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए आपको कौन से बेहद आसान और असरदार उपाय करने चाहिए।
33 कोटि देवी-देवताओं की कृपा दिलाएगा 33 बत्ती का दीपदान, जीवन से खत्म होगी आर्थिक तंगी
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, अधिक मास के आखिरी दिन दीपदान करने का अत्यधिक महत्व बताया गया है क्योंकि पुरुषोत्तम मास के स्वामी स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु हैं। मलमास के अंतिम दिन शाम के समय गाय के शुद्ध घी में 33 बत्तियों का एक विशेष दीपक जलाना अत्यंत फलदायी और चमत्कारी माना जाता है। ज्योतिष में संख्या 33 को हमारे 33 कोटि (प्रकार) देवी-देवताओं का प्रतीक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन 33 बत्तियों का दीपदान करने से ब्रह्मांड के सभी देवी-देवताओं की पूजा का पुण्य फल एक साथ मिल जाता है। यह दीपदान सीधे तौर पर भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जिससे व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पाप मिट जाते हैं और मां लक्ष्मी की असीम कृपा से घर में स्थाई सुख-समृद्धि, खुशहाली और धन का आगमन होता है।
श्री हरि विष्णु और मां लक्ष्मी के स्थाई वास के लिए आज अवश्य करें ये 4 चमत्कारी उपाय
यदि आप लंबे समय से आर्थिक संकट, कर्ज या करियर में आ रही बाधाओं से परेशान हैं, तो आज सोमवती अमावस्या और अधिक मास के इस अंतिम दिन नीचे दिए गए उपायों को पूरी श्रद्धा के साथ जरूर आजमाएं:
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विष्णु सहस्रनाम और महामंत्रों का जाप: चूंकि पुरुषोत्तम मास पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए आज के दिन श्री हरि की विशेष अनुकंपा पाने के लिए 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें। इसके अलावा नारायण के प्रभावी मंत्रों का लाल चंदन या तुलसी की माला से जाप करने पर कुंडली के सभी दोष दूर होते हैं।
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सामर्थ्य अनुसार महादान: मलमास के आखिरी दिन किए गए दान का फल कभी समाप्त नहीं होता। आज अपनी श्रद्धा और जेब के अनुसार किसी जरूरतमंद, गरीब या योग्य ब्राह्मण को अन्न (गेहूं, चावल), वस्त्र, धन और मौसमी फलों का दान अवश्य करें। ऐसा करने से पितृ देव भी प्रसन्न होते हैं।
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शाम को तुलसी के पास दीपक और परिक्रमा: हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को साक्षात मां लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। आज सूर्यास्त के बाद तुलसी के क्यारे के पास गाय के घी का दीपक जलाएं और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र बोलते हुए तुलसी जी की कम से कम 11 या 21 बार परिक्रमा करें। इससे घर से दरिद्रता हमेशा के लिए चली जाती है।
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व्रत और नियमों का विधिपूर्वक उद्यापन: अगर आपने इस पूरे अधिक मास के दौरान किसी विशेष नियम, उपवास, मंत्र जप या किसी अन्य धार्मिक अनुष्ठान का पालन किया है, तो आज के दिन किसी विद्वान पंडित की सलाह से उसका विधि-विधान से उद्यापन जरूर करें, ताकि आपकी पूजा पूरी तरह सफल हो सके।
देश के प्रमुख तीर्थों और पवित्र नदियों में स्नान-दान के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
सोमवती अमावस्या और अधिक मास के समापन के इस दुर्लभ संयोग के चलते आज सुबह से ही देश के विभिन्न कोनों, विशेषकर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (संगम), वाराणसी (काशी), गढ़मुक्तेश्वर और उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा स्नान के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है। स्थानीय प्रशासन ने भी सोमवती अमावस्या के इस पावन पर्व पर सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े इंतजाम किए हैं। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन पवित्र नदियों में डुबकी लगाने और जल में काले तिल मिलाकर सूर्य देव को अर्घ्य देने से न केवल मां लक्ष्मी की कृपा मिलती है, बल्कि पितरों की आत्मा को भी मोक्ष प्राप्त होता है, जिससे परिवार में चल रहे पितृदोष और गृहक्लेश शांत होते हैं।