पंजाब कांग्रेस में बड़ा धमाका: 'राजा' ही रहेंगे बॉस! अंदरूनी कलह के बीच भूपेश बघेल का दिल्ली से कड़ा फरमान
पंजाब कांग्रेस के भीतर पिछले कई दिनों से चल रही खींचतान और बगावती सुरों पर आलाकमान ने पूरी तरह से विराम लगा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व और पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी भूपेश बघेल ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि पंजाब में लीडरशिप को लेकर किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ही पंजाब कांग्रेस के 'राजा' बने रहेंगे। दिल्ली में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग के बाद आए इस फैसले ने जहां विरोधी गुट के हौसले पस्त कर दिए हैं, वहीं राजा वड़िंग के समर्थकों में जश्न का माहौल है।
पंजाब में लगातार मिल रही चुनावी चुनौतियों और नेताओं की आपसी बयानबाजी के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि हाईकमान राज्य इकाई में कोई बड़ा फेरबदल कर सकता है। लेकिन छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने साफ शब्दों में अनुशासनहीनता बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी का पूरा फोकस आगामी रणनीतियों पर है, न कि आंतरिक गुटबाजी को हवा देने पर।
सिद्धू और वड़िंग गुट में आर-पार! क्यों सुलग रही थी पंजाब कांग्रेस की सियासत?
पंजाब कांग्रेस में कलह कोई नई बात नहीं है, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों से राजा वड़िंग और नवजोत सिंह सिद्धू के समर्थकों के बीच सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक बयानबाजी तेज हो गई थी। विरोधी खेमे का तर्क था कि राज्य में पार्टी को नए और आक्रामक चेहरे की जरूरत है। इस खींचतान के बीच कई वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली दरबार में डेरा डाल दिया था।
नेताओं को उम्मीद थी कि प्रभारी बदलने के बाद पंजाब संगठन के ढांचे में भी बदलाव होगा। हालांकि, भूपेश बघेल ने सभी असंतुष्ट नेताओं की क्लास लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना सही है, लेकिन पार्टी लाइन से बाहर जाकर अनुशासन तोड़ना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कड़े रुख के बाद साफ है कि आलाकमान राजा वड़िंग के सांगठनिक काम और उनके नेतृत्व पर पूरा भरोसा जता रहा है।
भूपेश बघेल का 'मिशन पंजाब': गुटबाजी खत्म करने के लिए बनाया नया 'पावर प्लान'
पंजाब का प्रभार संभालते ही भूपेश बघेल के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिखरी हुई कांग्रेस को एक मंच पर लाना था। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुई बंद कमरे की बैठक में बघेल ने दोटूक कहा, "पार्टी एक व्यक्ति से नहीं, संगठन से चलती है। जिन्हें राजा वड़िंग के नेतृत्व से दिक्कत है, वे अपनी शिकायत सीधे मुझसे करें, न कि मीडिया के सामने जाकर तमाशा बनाएं।"
इस फैसले के जरिए कांग्रेस आलाकमान ने राज्य के कैडर को एक मजबूत संदेश दिया है कि लीडरशिप पूरी तरह स्थिर है। अब राजा वड़िंग के पास संगठन को नए सिरे से मजबूत करने और ब्लॉक स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने की पूरी छूट होगी। जानकारों का मानना है कि इस कड़े फैसले से पंजाब कांग्रेस का आंतरिक क्लेश कुछ समय के लिए शांत जरूर हो सकता है, लेकिन असंतुष्ट गुट की अगली रणनीति क्या होगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।