अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के इस कोडनेम के पीछे छिपा है 168 मासूम बच्चियों का दर्दनाक इतिहास
स्विट्जरलैंड की धरती पर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता एक बेहद भावुक और कूटनीतिक मोड़ पर है। अंतरराष्ट्रीय जगत की निगाहें उस ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर टिकी हैं जिसे 'मीनाब 168' (Minab 168) का कोडनेम दिया गया है। यह नाम केवल एक पहचान नहीं, बल्कि उन 168 स्कूली बच्चियों की याद दिलाता है, जिन्होंने एक मिसाइल हमले में अपनी जान गंवा दी थी। ईरान का यह कदम सीधे तौर पर अमेरिका को उस त्रासदी की याद दिला रहा है, जिसे वे कभी भूल नहीं पाए हैं।
दर्दनाक इतिहास से जुड़ा है 'मीनाब 168'
ईरानी प्रेस टीवी के अनुसार, यह कोडनेम 28 फरवरी की उस काली तारीख को समर्पित है, जब युद्ध के पहले ही दिन मीनाब स्कूल पर अमेरिकी-इजरायली टॉमहॉक मिसाइल से हमला किया गया था। इस बर्बर हमले में 168 स्कूली बच्चियों की मौत हो गई थी। वार्ता में इस नाम का उपयोग कर ईरान ने कूटनीतिक रूप से यह संदेश दिया है कि उनके लिए यह बातचीत सिर्फ परमाणु समझौते तक सीमित नहीं, बल्कि अपने उन शहीदों की स्मृति और सम्मान से भी जुड़ी है।
ट्रंप प्रशासन और ईरान: एक नए अध्याय की तलाश
स्विट्जरलैंड में हो रही यह वार्ता परमाणु मुद्दों और लेबनान में युद्धविराम जैसे व्यापक विषयों पर केंद्रित है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति वेंस कर रहे हैं, जिसमें सलाहकार जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकाफ भी शामिल हैं। वेंस ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान के साथ संबंधों में 'नई शुरुआत' के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल करना और शांति व समृद्धि की दिशा में मिलकर काम करना है।
इस्लामाबाद मेमोरैंडम (MoU) और आगे की राह
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि यह वार्ता पिछले सप्ताह हुए 'इस्लामाबाद मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' के फॉलोअप मैकेनिज्म पर आधारित है। इस एमओयू पर डोनल्ड ट्रंप, मसूद पेजेश्कियान और मध्यस्थ शहबाज शरीफ ने डिजिटल हस्ताक्षर किए थे। हालांकि अब आमने-सामने हस्ताक्षर के बजाय, इन शर्तों को जमीन पर लागू करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान का दावा है कि एमओयू की शर्तें उनके पक्ष में हैं और कतर में फंसे ईरान के छह अरब डॉलर की वापसी जल्द संभव हो सकेगी।
परमाणु मुद्दे पर ईरान का स्टैंड
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका की मुख्य चिंता ईरान की परमाणु क्षमता है। उन्होंने कहा, "अमेरिकी प्रशासन केवल यह चाहता है कि हम परमाणु बम न बनाएं। इस पर हमारे सुप्रीम लीडर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हमारी ऐसी कोई मंशा नहीं है।" यह वार्ता केवल ईरान के लिए आर्थिक प्रतिबंधों से मुक्ति का जरिया नहीं है, बल्कि अमेरिका के लिए भी पश्चिम एशिया में अपने खोए हुए प्रभाव को फिर से हासिल करने की एक बड़ी चुनौती है।