NEET री-टेस्ट: कांग्रेस की रैली के ट्रैफिक जाम में फंसा छात्रों का भविष्य, परीक्षा से चूके कई परीक्षार्थी
देशभर में नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले के बाद जब 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, तो छात्रों के लिए यह परीक्षा एक अग्निपरीक्षा से कम नहीं थी। लेकिन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में छात्रों का यह इम्तिहान परीक्षा केंद्रों के अंदर से ज्यादा बाहर की सड़कों पर कठिन हो गया। शहर में आयोजित सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी की एक रैली के कारण लगे भीषण ट्रैफिक जाम में फंसे कई छात्र परीक्षा केंद्र तक समय पर नहीं पहुंच सके, जिसके बाद से ही प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
सड़क पर बहे आंसू, गेट पर लटके ताले
नीट की री-परीक्षा के लिए छात्रों को दोपहर 1:30 बजे तक केंद्र पर पहुंचना अनिवार्य था। बेंगलुरु की सड़कों पर कांग्रेस की रैली के कारण जगह-जगह जाम लग गया, जिससे गाड़ियां रेंगने लगीं। परेशान अभिभावक अपने दोपहिया वाहनों को फुटपाथों पर दौड़ाते नजर आए, फिर भी कम से कम तीन छात्र निर्धारित समय पर गेट तक नहीं पहुंच सके। कड़ी सुरक्षा और सख्त नियमों के चलते, देरी होने पर उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिली। अपने बच्चों को रोते और भविष्य बर्बाद होता देख अभिभावकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
'कोटा जाने वाले राहुल गांधी अब कहां हैं?'
अभिभावकों ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा। एक छात्र के पिता कृष्ण मूर्ति ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, "जो रास्ता 20 मिनट में तय हो जाता था, उसे पार करने में 35 मिनट से ज्यादा लग गए। रैली शहर के बीचों-बीच करने के बजाय बाहरी इलाकों में की जानी चाहिए थी।" एक अन्य अभिभावक ने राहुल गांधी का नाम लेते हुए पूछा कि जो नेता छात्रों के मुद्दों पर कोटा तक जाते हैं, वे आज बेंगलुरु में अपनी ही पार्टी द्वारा पैदा की गई इस बाधा पर चुप क्यों हैं?
भाजपा और कांग्रेस में 'वार-पलटवार'
यह मामला सामने आते ही कर्नाटक की राजनीति गरमा गई है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने सोशल मीडिया पर रोते हुए अभिभावकों का वीडियो साझा कर कांग्रेस सरकार पर 'सत्ता की भूख' का आरोप लगाया। वहीं, भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को घेरा और कहा कि पार्टी ने छात्रों के भविष्य को राजनीति के नीचे दबा दिया।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे भाजपा का 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया। राज्य सरकार के मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा, "भाजपा को 10 सालों में हुए पेपर लीक पर माफी मांगनी चाहिए। बेंगलुरु में केवल तीन छात्र लेट हुए, जिनमें से एक का एडमिट कार्ड पुराना था। हमने पहले ही ट्रैफिक एडवाइजरी और हेल्पलाइन जारी कर दी थी।"
क्या छात्रों का भविष्य है राजनीति से बड़ा?
भले ही राजनीतिक दल एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हों, लेकिन इस हंगामे के बीच सबसे बड़ी मार उन मेधावी छात्रों पर पड़ी है जिन्होंने महीनों तक इस परीक्षा के लिए पसीना बहाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील दिन पर किसी भी राजनीतिक रैली का आयोजन करना प्रशासनिक लापरवाही का हिस्सा है। क्या भविष्य में प्रशासन ऐसे आयोजनों को रोककर छात्रों के भविष्य को प्राथमिकता देगा? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।