20 लाख छात्रों ने दिया डॉक्टर बनने का इम्तिहान, 'टीम भारत' की निगरानी में शांतिपूर्ण संपन्न हुई दोबारा परीक्षा
देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) रविवार को एक बार फिर कड़ी सुरक्षा और अभूतपूर्व सतर्कता के बीच संपन्न हुई। करीब 20 लाख से अधिक छात्रों ने मेडिकल स्नातक कोर्सों में दाखिले के लिए अपनी किस्मत आजमाई। पिछली बार पेपर लीक की शिकायतों के बाद रद हुई परीक्षा को लेकर इस बार शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सुरक्षा के ऐसे अभूतपूर्व बंदोबस्त किए थे कि किसी भी गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं बची।
सुरक्षा का 'कवच': त्रिस्तरीय जांच और हाई-टेक मॉनिटरिंग
इस बार परीक्षा माफियाओं और दुष्प्रचार करने वालों पर नकेल कसने के लिए एनटीए ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के लिए छात्रों को त्रिस्तरीय जांच प्रक्रिया—बायोमीट्रिक, फिजिकल और दस्तावेज सत्यापन से गुजरना पड़ा। पूरे देश के 95 हजार परीक्षा कक्षों की निगरानी 1.38 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए की गई। इतना ही नहीं, किसी भी इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी को रोकने के लिए 53,311 हाई-कैपेसिटी जैमर लगाए गए थे। हर शहर में साइबर कमांडो की तैनाती और स्थानीय पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों के समन्वय ने इसे 'टीम भारत' का एक सामूहिक प्रयास बना दिया।
छात्रों के लिए 15 मिनट का एक्स्ट्रा तोहफा
इस दोबारा परीक्षा में छात्रों को एक बड़ी राहत देते हुए एनटीए ने 15 मिनट का अतिरिक्त समय प्रदान किया। यह समय मुख्य रूप से परीक्षा से संबंधित कागजी कार्रवाई के लिए दिया गया था, ताकि छात्र पूरे तीन घंटे का समय अपने प्रश्नपत्र को हल करने पर ध्यान केंद्रित कर सकें। दोपहर दो बजे शुरू हुई यह परीक्षा शाम 5.15 बजे खत्म हुई। परीक्षा के बाद बाहर निकले छात्रों के चेहरों पर राहत और संतोष के भाव थे।
जब पीएम मोदी ने एयरपोर्ट पर रुककर छात्रों का रास्ता किया साफ
नीट-यूजी के दौरान छात्रों की सुविधा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मिसाल कायम की। रविवार दोपहर 1.15 बजे जब पीएम मोदी दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, तो उस समय छात्रों के केंद्रों पर पहुंचने का चरम समय था। पीएम के काफिले के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम से छात्रों को परेशानी न हो, इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने प्रोटोकॉल को दरकिनार कर दिया। प्रधानमंत्री ने करीब 45 मिनट तक एयरपोर्ट पर ही प्रतीक्षा की और वहां से तब रवाना हुए जब दोपहर के दो बज गए और परीक्षा शुरू हो चुकी थी।
हर छात्र का रखा गया विशेष ध्यान
एनटीए ने इस परीक्षा में शामिल होने वाले हर एक छात्र की सुविधा का ख्याल रखा। चाहे वह कोलकाता की सड़क हादसे में घायल छात्रा हो या कीमोथेरेपी करवा रहा छात्र, सभी के लिए विशेष प्रबंध किए गए। करीब 10 हजार दिव्यांग छात्रों और विभिन्न मेडिकल कंडीशन वाले अभ्यर्थियों के लिए एनटीए ने उनके पक्के इरादे को देखते हुए परीक्षा केंद्रों पर पूरी तैयारी रखी थी।
2 लाख छात्र रहे अनुपस्थित, ये रहे कारण
आंकड़ों के अनुसार, इस बार करीब 2 लाख छात्र परीक्षा में अनुपस्थित रहे। एनटीए सूत्रों के मुताबिक, इसके पीछे मुख्य कारण परीक्षा रद होने के कारण तैयारी के लिए कम समय मिलना और कुछ छात्रों का जेईई, बीएससी या नर्सिंग जैसे अन्य करियर विकल्पों की ओर रुख करना रहा। एनटीए महानिदेशक अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा पूरी तरह सुरक्षित रही और किसी भी प्रकार की अनियमितता की कोई शिकायत नहीं मिली है।