छठा वर्ल्ड कप खेल रहे ओचोआ पहले मैच से बाहर, वजह आई सामने
फीफा विश्व कप 2026 (FIFA World Cup 2026) का रोमांचक आगाज मैक्सिको सिटी के ऐतिहासिक मैदान पर हो चुका है। पूरा स्टेडियम अपने चहेते और दुनिया के सबसे बेहतरीन गोलकीपरों में शुमार गुइलेर्मो ओचोआ (Guillermo Ochoa) को मैदान पर देखने के लिए बेताब था। लेकिन जब मैक्सिको की शुरुआती प्लेइंग इलेवन (Playing XI) का एलान हुआ, तो हर कोई हैरान रह गया। रिकॉर्ड छठी बार विश्व कप टीम में जगह बनाकर इतिहास रचने वाले 40 वर्षीय ओचोआ दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ इस ओपनिंग मुकाबले में मैदान पर नहीं उतरे। आखिर क्यों मैक्सिको के इस सबसे अनुभवी दीवार और कप्तान जैसे लीडर को बाहर बैठना पड़ा? खेल संपादक वरुण मलिक की इस विशेष खोजी डिजिटल रिपोर्ट में जानिए इस चौंकाने वाले फैसले के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी।
किस्मत का अजीब खेल: मालागॉन की चोट से चमकी रेंगल की तकदीर, ओचोआ बने 'प्लान बी'
दरअसल, 2006 के विश्व कप से लगातार टीम की रीढ़ रहे गुइलेर्मो ओचोआ को बाहर रखने का फैसला कोई अचानक लिया गया कदम नहीं है। मुख्य कोच की रणनीति के तहत अब युवा गोलकीपर राउल रेंगल (Raul Rangel) को टीम के पहले नंबर के गोलकीपर के तौर पर प्रमोट किया गया है, जिन्होंने ओचोआ को रेस में पीछे छोड़ दिया है। ओचोआ इस समय टीम के तीन मुख्य गोलकीपरों में शामिल तो हैं, लेकिन वे मुख्य प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं हैं। रणनीति के मुताबिक वे रेंगल के चोटिल या बाहर होने की स्थिति में ही मैदान पर उतरेंगे। इस कहानी में ट्विस्ट यह भी है कि रेंगल खुद पहले नंबर की पसंद नहीं थे, बल्कि मैक्सिको के मुख्य कीपर लुइस मालागॉन की एड़ी की नस (Achilles Tendon) फटने के कारण अचानक रेंगल की किस्मत खुली और ओचोआ बेंच पर ही रह गए। इसके बावजूद, ओचोआ का ड्रेसिंग रूम में होना ही युवा खिलाड़ियों को गजब का आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन दे रहा है।
2010 के ऐतिहासिक महामुकाबले का पुनर्मंच, तब दक्षिण अफ्रीका था मेजबान और आज मैक्सिको है सह-मेजबान
मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका (Bafana Bafana) के बीच खेला गया यह मैच फुटबॉल प्रेमियों के लिए पुरानी यादें ताजा करने जैसा है। यह ठीक 2010 के फीफा विश्व कप के उद्घाटन मैच का एक शानदार रीमैच (पुनर्मंच) है। दिलचस्प बात यह है कि साल 2010 में जब ये दोनों टीमें ओपनिंग मैच में भिड़ी थीं, तब दक्षिण अफ्रीका मेजबान देश था और वह मुकाबला 1-1 की बराबरी पर छूटा था। आज वक्त का पहिया ऐसा घूमा है कि मैक्सिको इस 23वें विश्व कप का सह-मेजबान बनकर अपनी धरती पर खेल रहा है। इतिहास के आंकड़ों पर नजर डालें तो इन दोनों टीमों के बीच अब तक कुल चार टक्कर हो चुकी हैं, जिसमें मैक्सिको 2-1 से आगे चल रहा है और एक मैच ड्रॉ रहा है।
नवंबर 2025 से अजेय है मैक्सिको की सेना, खूंखार फॉर्म के साथ जीतना था बेहद जरूरी
अगर मौजूदा फॉर्म की बात करें तो मैक्सिको की टीम इस समय अपनी सबसे खतरनाक फॉर्म में चल रही है। टीम ने नवंबर 2025 के बाद से अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में हार का मुंह तक नहीं देखा है। पिछले आठ मैचों में मैक्सिको ने छह शानदार जीत दर्ज की हैं और दो मैच ड्रॉ खेले हैं। इस घरेलू मैदान (Estadio Azteca) और फीफा रैंकिंग का फायदा उठाते हुए मैक्सिको इस मैच में जीत का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा था। टीम के लिए इस मैच में पूरे तीन अंक बटोरना बेहद जरूरी था क्योंकि इस बार का ग्रुप स्टेज बिल्कुल आसान नहीं है। इस ग्रुप में चेक गणराज्य और दक्षिण अफ्रीका जैसी बेहद अप्रत्याशित और मजबूत टीमें मौजूद हैं, जो कभी भी मैच का पासा पलट सकती हैं।
दोनों टीमों की अंतिम एकादश (Playing XI) पर एक नजर
इस हाई-वोल्टेज मुकाबले के लिए दोनों देशों के कोचों ने इन खिलाड़ियों पर भरोसा जताया था:
मैक्सिको एकादश: राउल रंगेल (गोलकीपर), सीज़र मोंटेस (कप्तान), जोहान वास्केज़, इज़राइल रेयेस, जीसस गैलार्डो, एरिक लीरा, अल्वारो फिडाल्गो, ब्रायन गुटिरेज़, राउल जिमेनेज, जूलियन क्विनोन्स, रॉबर्टो अल्वाराडो।
दक्षिण अफ़्रीका एकादश: रोनवेन विलीअम्स (कप्तान/गोलकीपर), ऑड्रे मोदिबा, मबेकेज़ेली मबोकाज़ी, नकोसिनथी सिबिसी, खुलिसो मुदाउ, इमे ओकोन, टेबोहो मोकोएना, स्फ़ेफ़ेलो सिथोले, जेडेन एडम्स, लाइल फोस्टर, इकराम रेनर्स।