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डॉलर की आमद पर RBI की चौबीसों घंटे नजर; बैंकों को रोज शाम 6 बजे तक डेटा देने का अल्टीमेटम

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने देश के बैंकिंग सेक्टर के लिए एक नया और कड़ा फरमान जारी किया है। केंद्रीय बैंक ने सभी वाणिज्यिक बैंकों (Commercial Banks) से कहा है कि वे विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंक-खाता यानी FCNR(B) जमा के साथ-साथ विशेष रियायती योजना के तहत जुटाई गई बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ECB) और विदेशी मुद्रा में उधारी (OFCB) से जुड़े तमाम आंकड़े रोजाना आधार पर साझा करें। बैंकिंग रेगुलेटर के इस कदम के बाद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई इन आंकड़ों को नियमित अंतराल पर, विशेष रूप से हर हफ्ते सार्वजनिक कर सकता है, ताकि बाजार में पारदर्शिता बनी रहे।

आज से लागू हुआ नया नियम, शाम 6 बजे तक देनी होगी रिपोर्ट

आरबीआई द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, सभी वाणिज्यिक बैंकों को आज यानी सोमवार, 22 जून 2026 से हर दिन शाम 6 बजे तक वित्तीय बाजार परिचालन विभाग (FOMD) को FCNR(B) जमा, ECB और OFCB के सटीक आंकड़े अनिवार्य रूप से जमा करने होंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य देश में आ रहे विदेशी फंड की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग करना है।

डॉलर लाने के लिए RBI खुद उठाएगा हेजिंग का खर्च

इस साल 8 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच जमा होने वाली FCNR(B) जमा राशियां आरबीआई की विशेष स्वैप (मुद्रा अदला-बदली) सुविधा के दायरे में आएंगी। केंद्रीय बैंक ने निवेशकों को लुभाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है—वह तय शर्तों को पूरा करने वाले डिपॉजिट्स पर हेजिंग (Hedging) से जुड़ी पूरी लागत खुद वहन करेगा। आसान शब्दों में कहें तो हेजिंग निवेश के लिए एक 'बीमा' की तरह काम करती है, जो विदेशी मुद्रा की विनिमय दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को पूरी तरह खत्म या संतुलित कर देती है।

एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने इस पर अपनी राय देते हुए कहा:

"FCNR(B) के जरिए देश में आने वाले विदेशी फंड पर पैनी नजर रखकर आरबीआई यह देखना चाहता है कि उसके नीतिगत फैसले उम्मीद के मुताबिक विदेशी मुद्रा देश में ला पा रहे हैं या नहीं। केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करना चाहता है कि जो लक्ष्य तय किया गया है, वह हकीकत में तब्दील हो।"

नोमुरा का बड़ा दावा: इस बार आ सकते हैं रिकॉर्ड 55 अरब डॉलर!

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म नोमुरा (Nomura) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2013 के मुकाबले विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों (NRIs) की आबादी में 70 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट कहती है कि प्रवासी भारतीयों का भारत के प्रति भरोसा हमेशा मजबूत रहता है, जिसके चलते वे कम 'कंट्री रिस्क प्रीमियम' पर भी भारत में निवेश करने को तैयार हो जाते हैं।

नोमुरा का अनुमान है कि साल 2026 की इस FCNR(B) विशेष योजना के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 55 अरब डॉलर (लगभग $55 Billion) की भारी-भरकम आमद हो सकती है। इस फंड का एक बड़ा हिस्सा अगस्त और सितंबर के महीनों में आने की उम्मीद जताई गई है। नोट में यह भी कहा गया है कि भले ही 2013 की तुलना में आज डॉलर काफी महंगा है, लेकिन 2026 की यह योजना वैश्विक निवेशकों को बेहतर रिटर्न और निवेश के शानदार अवसर दे रही है।

2013 के मुकाबले इस बार बड़ी चुनौती, RBI बढ़ाएगा समयसीमा

यह पहला मौका नहीं है जब आरबीआई डॉलर की आमद बढ़ाने के लिए ऐसी स्कीम लेकर आया है। इससे पहले साल 2013 में (4 सितंबर से 30 नवंबर) जब ऐसी ही योजना आई थी, तब इसके जरिए 26 अरब डॉलर देश में आए थे। हालांकि, उस दौरान आरबीआई ने केवल चार बार ही आंकड़े सार्वजनिक किए थे। लेकिन इस बार कहानी अलग है।

इस साल (2026) इस योजना की अवधि करीब 4 महीने की है, जो 2013 के मुकाबले काफी अधिक है। एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने बताया कि इस बार रकम जुटाने का पैमाना और लक्ष्य 2013 के मुकाबले बहुत बड़ा है, इसलिए बाजार के सेंटिमेंट को मजबूत रखने के लिए अधिक बार रिपोर्टिंग और पारदर्शिता की जरूरत है।

पिछले साल की भारी गिरावट को पाटने की कोशिश

आरबीआई का यह आक्रामक रुख इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान FCNR(B) की आमद में अप्रत्याशित गिरावट देखी गई थी। पिछले वित्त वर्ष में जहां 7.08 अरब डॉलर भारत आए थे, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा सिमटकर महज 94.6 करोड़ डॉलर रह गया था। हालांकि, 31 मार्च 2026 तक भारत के पास कुल बकाया FCNR(B) जमा 33.8 अरब डॉलर दर्ज की गई थी। बाजार के जानकारों का कहना है कि डेटा नियमित रूप से जारी होने से निवेशकों और फॉरेक्स मार्केट को आरबीआई के इस मास्टरस्ट्रोक के जमीनी असर का सटीक अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी।

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