Inauspicious Days : शादी, गृह प्रवेश या नया काम अगले 8 दिन सब रहेगा बंद, जानिए कब से लग रहा है होलाष्टक
News India Live, Digital Desk : होली आने से ठीक पहले, पूरे 8 दिनों का एक ऐसा समय आता है, जब हिंदू धर्म में किसी भी तरह के शुभ और मांगलिक कार्यों को करना वर्जित माना जाता है। इसी अवधि को होलाष्टक कहा जाता है। चाहे शादी हो, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार हो या किसी नए व्यवसाय की शुरुआत, ये 8 दिन सभी शुभ कामों के लिए बिल्कुल सही नहीं माने जाते हैं।
आइए, जानते हैं कि इस साल यह होलाष्टक कब से शुरू हो रहा है, यह क्यों अशुभ माना जाता है, और इन 8 दिनों में आपको किन कामों से बचकर रहना चाहिए।
कब से कब तक है होलाष्टक 2024?
होली फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। होलाष्टक की शुरुआत होलिका दहन के 8 दिन पहले यानी फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है और यह होलिका दहन के साथ ही समाप्त हो जाता है।
| विवरण | तिथि और दिन |
| होलाष्टक आरंभ | [यह जानकारी उस साल के अनुसार बदलती है, लेकिन मान लें] मंगलवार, 10 मार्च 2026 (फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि) |
| होलाष्टक समापन | मंगलवार, 17 मार्च 2026 (होलिका दहन के दिन) |
| रंगों वाली होली | बुधवार, 18 मार्च 2026 |
यानी, इन 8 दिनों के बीच कोई भी शुभ काम करना वर्जित माना जाता है।
होलाष्टक को क्यों मानते हैं अशुभ? (पौराणिक कथा)
होलाष्टक को अशुभ मानने के पीछे दो मुख्य पौराणिक कथाएं हैं:
- कामदेव की कथा: एक अन्य मान्यता के अनुसार, इन दिनों में भगवान शिव ने तपस्या भंग करने के कारण कामदेव को भस्म कर दिया था। इस दुख की वजह से यह काल शोक और तपस्या का माना जाता है, न कि भौतिक सुखों और मांगलिक कार्यों का।
होलाष्टक के दौरान कौन से काम भूलकर भी न करें?
इन 8 दिनों में खासकर ये बड़े काम नहीं करने चाहिए, वरना उनका उल्टा परिणाम मिल सकता है:
- गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश (गृह प्रवेश) या किसी नए मकान की नींव डालना वर्जित होता है।
- नए व्यापार की शुरुआत: नया व्यवसाय या दुकान खोलना शुभ फल नहीं देता है।
- नए कपड़े पहनना: होलाष्टक शुरू होने के बाद नए वस्त्र, खासकर नए आभूषण पहनना या खरीदना मना होता है।
- मुंडन संस्कार: बच्चों का मुंडन या कोई भी अन्य सोलह संस्कार (विवाह को छोड़कर) इन दिनों में नहीं किए जाते।
- यज्ञ या हवन (होलिका दहन को छोड़कर): अन्य सामान्य यज्ञ-हवन नहीं किए जाते हैं।
लेकिन आप क्या कर सकते हैं?
हालांकि शुभ काम बंद होते हैं, लेकिन इन 8 दिनों को तपस्या, ध्यान, पूजा-पाठ और जप-तप के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इस दौरान आप भगवान की भक्ति, दान-पुण्य और हवन-पूजा पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। यह समय खुद को अध्यात्म से जोड़ने और आने वाली होली के उत्सव की तैयारी का होता है।