महाराणा प्रताप के सम्मान में राजस्थान सरकार का मास्टर स्ट्रोक शिविरा पंचांग में हुआ बड़ा फेरबदल
News India Live, Digital Desk : राजस्थान की मिट्टी का कण-कण वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की वीरता की कहानियों से भरा हुआ है। उनकी बहादुरी के किस्से हम बचपन से ही सुनते आए हैं, लेकिन अब राजस्थान सरकार ने बच्चों को उनके गौरवशाली इतिहास से और भी करीब से जोड़ने के लिए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है।
राजस्थान के सरकारी और निजी स्कूलों में अब महाराणा प्रताप का राज्याभिषेक दिवस (Maharana Pratap Coronation Day) अनिवार्य रूप से मनाया जाएगा। अच्छी खबर ये है कि इसके लिए राजस्थान शिक्षा विभाग ने अपने अधिकारिक कैलेंडर यानी 'शिविरा पंचांग' (Shivira Panchang) में जरूरी बदलाव कर दिए हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
दरअसल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार चाहती है कि नई पीढ़ी को सिर्फ रटी-रटाई बातें न बताई जाएं, बल्कि उन्हें महाराणा प्रताप जैसे महापुरुषों के त्याग और शौर्य का साक्षात अहसास कराया जाए। राज्याभिषेक का उत्सव मनाकर बच्चों को उस ऐतिहासिक दौर की अहमियत समझाई जाएगी। शिविरा पंचांग में बदलाव का सीधा मतलब ये है कि अब हर साल स्कूलों की कार्ययोजना में इस दिन का एक विशेष स्थान होगा।
क्या-क्या बदल जाएगा?
पहले 'शिविरा पंचांग' में कई उत्सव और जयंतियां होती थीं, लेकिन प्रताप के राज्याभिषेक उत्सव को इतनी प्रमुखता नहीं मिली थी। अब बदले हुए पंचांग के अनुसार, स्कूलों को बाकायदा आयोजन करने होंगे। इसमें कविता पाठ, नाटक, भाषण और इतिहास से जुड़ी प्रतियोगिताओं के जरिए छात्रों को जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे बच्चों में न केवल देशभक्ति की भावना जागेगी, बल्कि उनमें स्वाभिमान और जुझारूपन की प्रेरणा भी आएगी।
प्रिंसिपल्स और शिक्षकों को मिले निर्देश
पंचांग में बदलाव होने के साथ ही शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। स्कूलों को सुनिश्चित करना होगा कि वे इस दिन को सादगी और गरिमा के साथ मनाएं। मेवाड़ के इतिहास और प्रताप की वीरता पर चर्चा के विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। अब राजस्थान के स्कूलों के लिए यह केवल एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति के सम्मान का एक मौका होगा।
एक नई शुरुआत
देखा जाए तो राजस्थान जैसे राज्य के लिए यह कदम बहुत भावनात्मक है। लोग इस फैसले का सोशल मीडिया पर भी खूब स्वागत कर रहे हैं। आम अभिभावकों का मानना है कि मोबाइल और रील की दुनिया में उलझे बच्चों को यह कदम उनकी जड़ों की ओर वापस ले जाएगा।
हकीकत ये है कि शिक्षा का मकसद सिर्फ सिलेबस खत्म करना नहीं होता, बल्कि अच्छे चरित्र और प्रेरणादायी आदर्शों को गढ़ना होता है। राजस्थान सरकार की यह पहल शायद उसी दिशा में एक ठोस कदम है।