RSS के मुद्दे पर कांग्रेस के ही दो महाबली भिड़े, हरीश चौधरी ने दिग्विजय सिंह को दिखाया आइना
News India Live, Digital Desk : पॉलीटिक्स में कहा जाता है कि दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है, लेकिन कभी-कभी अपने ही आपस में भिड़ जाते हैं और फिर मामला पूरी तरह से चर्चा का विषय बन जाता है। ताजा मामला कांग्रेस पार्टी के भीतर से ही आया है। वैसे तो कांग्रेस अक्सर बीजेपी और आरएसएस (RSS) को घेरती रहती है, लेकिन इस बार संघ को घेरने के चक्कर में मध्य प्रदेश के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह खुद ही अपनी पार्टी के एक दूसरे कद्दावर नेता के निशाने पर आ गए हैं।
विवाद की जड़ क्या है?
बात शुरू हुई दिग्विजय सिंह की एक सोशल मीडिया पोस्ट से। दिग्विजय सिंह ने आरएसएस को लेकर कुछ पुराने दावे या पोस्ट साझा की (जैसा कि वे अक्सर करते रहते हैं)। लेकिन इस बार उनकी यह 'पुरानी लकीर पीटने वाली आदत' राजस्थान के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री हरीश चौधरी को ज़रा भी पसंद नहीं आई। हरीश चौधरी ने बिना किसी झिझक के खुलेआम दिग्विजय सिंह को नसीहत दे डाली।
हरीश चौधरी ने आखिर क्या कहा?
हरीश चौधरी का रिएक्शन एकदम तीखा और 'पॉइंट टू पॉइंट' था। उन्होंने एक तरह से दिग्विजय सिंह को आईना दिखाते हुए कहा कि आज की राजनीति और जमीनी मुद्दे अलग हैं। पुराने दौर की उन बातों या पोस्टों को बार-बार उठाने से न तो पार्टी को कोई फायदा हो रहा है और न ही युवाओं के बीच कांग्रेस का कोई बड़ा मैसेज जा रहा है। उन्होंने साफ लहजे में समझाया कि आज फोकस उन नीतियों और विचारधारा पर होना चाहिए जो देश का भविष्य तय करें, न कि पुरानी विवादित फाइलों को झाड़ने पर।
पार्टी के भीतर छिड़ी बहस
हकीकत तो यह है कि यह सिर्फ दो नेताओं के बीच का झगड़ा नहीं है, बल्कि कांग्रेस के भीतर दो तरह की 'सोच' की जंग है। एक गुट दिग्विजय सिंह की तरह कट्टर आक्रामक रवैया रखना चाहता है, तो दूसरा गुट (जिसमें हरीश चौधरी जैसे नेता शामिल हैं) चाहता है कि पार्टी फिजूल के पुराने विवादों में पड़ने के बजाय व्यावहारिक मुद्दों पर फोकस करे।
हरीश चौधरी का यह कड़ा स्टैंड बताता है कि अब कांग्रेस के भीतर 'सब ठीक है' वाली चादर धीरे-धीरे खिसक रही है। राजस्थान के नेता अब अपनी बात बेबाकी से रख रहे हैं, चाहे सामने मध्य प्रदेश के दिग्विजय सिंह जैसे कद्दावर चेहरा ही क्यों न हो।
आगे क्या होगा?
सोशल मीडिया पर इस पोस्ट और उसके जवाब ने बवाल मचा दिया है। बीजेपी इसे 'कांग्रेस की आपसी सिरफुटव्वल' बताकर मजे ले रही है। वहीं, आम कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या आरएसएस के विरोध का तरीका भी अब पार्टी के नेताओं के बीच मतभेद पैदा करने लगा है?
कुल मिलाकर देखा जाए, तो दिग्विजय सिंह की वह पोस्ट उन्हें बैकफायर कर गई है। हरीश चौधरी की इस सार्वजनिक खिंचाई के बाद कांग्रेस हाईकमान इसे कैसे हैंडल करेगा, यह देखना काफी दिलचस्प होगा। लेकिन इतना तय है कि राजस्थान और एमपी की राजनीति की यह नई तकरार अभी जल्दी ठंडी नहीं होने वाली।