सकट चौथ 2026 व्रत रख लिया, पर 'यह' नहीं पढ़ा तो पूजा अधूरी रह जाएगी जानिए सही नियम
News India Live, Digital Desk : अगर आप एक मां हैं, तो सकट चौथ (Sakat Chauth) का महत्व आपसे बेहतर कौन जान सकता है? यह साल का वो दिन होता है जब मां अपनी भूख-प्यास भूलकर, निर्जला रहकर बस एक ही दुआ मांगती है मेरे बच्चे पर कभी कोई आंच न आए।" 2026 में माघ महीने की यह पावन चतुर्थी आ गई है, जिसे हम तिल-कुटा चौथ (Til Kuta Chauth) भी कहते हैं।
लेकिन, क्या आप जानती हैं कि सिर्फ भूखे रहने और चंद्रमा को अर्घ्य देने से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता? ज्योतिष और बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि इस दिन एक छोटी सी चीज़, यानी 'गणेश चालीसा' का पाठ करना पूजा की जान होता है।
गणेश चालीसा ही क्यों?
देखिए, हम जिस देवता का व्रत कर रहे हैं, उनका मनपसंद पाठ करना तो बनता है। भगवान गणेश को 'विघ्नहर्ता' कहा जाता है। 'सकट' का मतलब ही होता है 'संकट'। जब आप पूजा के दौरान मन लगाकर गणेश चालीसा का पाठ करती हैं, तो माना जाता है कि बप्पा प्रसन्न होकर आपके बच्चों के रास्ते में आने वाली सारी रुकावटें और मुश्किलें (Obstacles) अपनी सूंड से दूर फेंक देते हैं।
पूजा का माहौल
इस दिन घर में तिल और गुड़ के लड्डू या 'कुटा' बनता है। शाम को जब आप पूजा के लिए बैठें, तो दीया जलाने और भोग लगाने के बाद शांति से बैठकर गणेश चालीसा जरूर पढ़ें। ऐसा कहा जाता है कि चालीसा के दोहे और चौपाइयों में इतनी शक्ति होती है कि घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है।
अगर पढ़ना न आए तो?
कई बार हमें संस्कृत के मंत्र पढ़ने में दिक्कत होती है, लेकिन चालीसा की हिंदी बहुत सरल है। अगर फिर भी आप नहीं पढ़ सकतीं, तो आजकल फोन पर ऑडियो चलाकर भी सुन सकती हैं। भाव सच्चा होना चाहिए, बप्पा भाषा नहीं, मां का प्यार देखते हैं।
तारीख और समय का ध्यान रखें
इस बार चतुर्थी की तिथि को लेकर कंफ्यूजन न पालें। माघ महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी 'संकष्टी चतुर्थी' के दिन यह व्रत रखा जाएगा। रात को चाँद देखने के बाद, बप्पा की आरती और चालीसा पढ़कर ही व्रत खोलें।
याद रखिए, यह व्रत सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि एक मां का अपने बच्चे के लिए 'सुरक्षा कवच' है। इसलिए पूरी श्रद्धा और सही विधि के साथ बप्पा को मनाएं।