शेयर बाजार से कमाया है पैसा? तो क्या आपको मिलेगी ₹7 लाख वाली टैक्स छूट? जानिए इनकम टैक्स का सबसे बड़ा सीक्रेट
इनकम टैक्स... यह एक ऐसा शब्द है, जिसके नियम-कानून अच्छे-अच्छों को कन्फ्यूज कर देते हैं। खासकर जब से नई और पुरानी टैक्स रिजीम (New vs Old Tax Regime) का चक्कर शुरू हुआ है, तब से यह उलझन और भी बढ़ गई है।
हम सबने एक बहुत ही अच्छी और राहत भरी बात सुनी है - "अगर आपकी टैक्सेबल इनकम 7 लाख रुपये (नई रिजीम में) या 5 लाख रुपये (पुरानी रिजीम में) से कम है, तो आपको कोई टैक्स नहीं देना पड़ता।" यह जादू होता है इनकम टैक्स के सेक्शन 87A के तहत मिलने वाली छूट (Rebate) की वजह से।
लेकिन असली कन्फ्यूजन तब शुरू होता है, जब आपकी कमाई सिर्फ सैलरी से नहीं, बल्कि कहीं और से भी होती है। मान लीजिए, आपने शेयर बाजार में पैसा लगाया और आपको शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (Short-Term Capital Gains - STCG) हो गया, जिस पर 15% का सीधा-सीधा टैक्स लगता है। या फिर आपको लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) हुआ।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या यह "स्पेशल इनकम" (Special Income) आपको ₹7 लाख वाली छूट से बाहर कर देगी? क्या सरकार सिर्फ सैलरी पर छूट देगी और शेयर बाजार वाली कमाई पर पूरा टैक्स वसूलेगी?
तो क्या है नियम? जवाब है - हां, पूरी इनकम पर मिलेगी छूट!
आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है! इनकम टैक्स का नियम इस मामले में बहुत ही सीधा और सरल है। सेक्शन 87A की छूट देने के लिए, इनकम टैक्स विभाग यह नहीं देखता कि आपकी कमाई कहां-कहां से हुई है। वह सिर्फ एक ही चीज देखता है - आपकी "कुल कर योग्य आय" (Total Taxable Income)।
इसका मतलब है कि अगर आपकी सैलरी, शेयर बाजार की कमाई, और दूसरे सभी स्रोतों से हुई कुल टैक्सेबल इनकम ₹7 लाख (नई रिजीम में) या ₹5 लाख (पुरानी रिजीम में) की सीमा के अंदर है, तो आपका कुल टैक्स (Total Tax Liability) जीरो हो जाएगा, भले ही उसमें शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स पर लगने वाला 15% टैक्स ही क्यों न शामिल हो।
आइए, इसे एक बहुत ही आसान उदाहरण से समझते हैं:
मान लीजिए, आपका नाम अजय है और आपने नई टैक्स रिजीम को चुना है।
- सैलरी से आपकी टैक्सेबल इनकम: ₹6,60,000
- शेयर बेचकर हुआ शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG): ₹40,000
- आपकी कुल टैक्सेबल आय (Total Taxable Income): ₹6,60,000 + ₹40,000 = ₹7,00,000
अब, बिना छूट के अजय का टैक्स कितना बनेगा:
- सैलरी पर टैक्स (नई रिजीम स्लैब के अनुसार): ₹22,500
- STCG पर टैक्स (15% की दर से): ₹40,000 का 15% = ₹6,000
- कुल टैक्स (बिना छूट के): ₹22,500 + ₹6,000 = ₹28,500
- सेस (4%): ₹28,500 का 4% = ₹1,140
- कुल देय टैक्स: ₹29,640
अब देखिए सेक्शन 87A का जादू:
- क्योंकि अजय की कुल टैक्सेबल आय (₹7,00,000) सीमा के अंदर है, उन्हें सेक्शन 87A के तहत ₹25,000 तक की छूट मिलेगी। (पुरानी रिजीम में यह छूट ₹12,500 है)।
- नई रिजीम में 7 लाख तक की आय पर टैक्स लायबिलिटी (सेस से पहले) 25000 ही बनती है |
- अजय का कुल टैक्स बन रहा है ₹25,000 + सेस, लेकिन नियम यह है कि अगर आपकी टैक्सेबल आय ₹7 लाख से ज्यादा नहीं है तो कोई टैक्स नहीं देना होगा |
तो नतीजा यह निकला कि अजय को सरकार को 0 रुपये टैक्स देना होगा!
यह नियम उन छोटे निवेशकों और नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बहुत बड़ी राहत है, जो शेयर बाजार में थोड़ा-बहुत निवेश करके अतिरिक्त आय कमाते हैं। तो अगली बार जब आप अपना ITR भरें, तो इस बात को लेकर बिल्कुल भी कन्फ्यूज न हों। अगर आपकी कुल टैक्सेबल आय सीमा के अंदर है, तो आपको आपकी स्पेशल इनकम पर भी पूरी छूट मिलेगी।