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April 23 2026 11:34 am

बंटोगे तो कटोगे नहीं, एकजुटता ही शक्ति है मंदिरों को लेकर जस्टिस बीवी नागरत्ना की दोटूक, हिंदुओं को दी बड़ी नसीहत

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News India Live, Digital Desk: सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना ने सामाजिक और धार्मिक एकता को लेकर एक बड़ा और प्रेरणादायक बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंदुओं को आपस में विभाजित होने के बजाय एकजुट रहना चाहिए। जस्टिस नागरत्ना का यह बयान उस समय आया है जब देश में मंदिरों के प्रबंधन और धार्मिक परंपराओं को लेकर अक्सर विवाद देखने को मिलते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिरों या पूजा पद्धतियों के आधार पर समाज का बंटवारा किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है।

एकता में ही धर्म का असली सार: जस्टिस नागरत्ना

एक निजी कार्यक्रम के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि हिंदू धर्म की महानता इसकी विविधता में है, लेकिन इस विविधता को विभाजन का कारण नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि "मंदिरों को लेकर मतभेद पैदा करना या उनके आधार पर समूहों में बंट जाना हमारी संस्कृति के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।" जस्टिस नागरत्ना के मुताबिक, जब लोग धर्म के नाम पर बंटते हैं, तो इससे न केवल समाज कमजोर होता है बल्कि लोकतांत्रिक ताना-बाना भी प्रभावित होता है।

मंदिरों के प्रबंधन और विवादों पर जताई चिंता

अक्सर देखा जाता है कि मंदिरों के नियंत्रण और वहां की व्यवस्थाओं को लेकर अलग-अलग गुटों में टकराव की स्थिति पैदा हो जाती है। इसी संदर्भ में जस्टिस नागरत्ना ने नसीहत दी कि श्रद्धा का केंद्र शांति और एकता का स्रोत होना चाहिए, न कि कलह का। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर समुदायों के बीच जो दूरियां बढ़ रही हैं, उन्हें संवाद और आपसी समझ से खत्म किया जाना चाहिए।

'विभाजन नहीं, समावेशी सोच की जरूरत'

जस्टिस नागरत्ना ने अपने संबोधन में समावेशी समाज (Inclusive Society) पर जोर देते हुए कहा कि हिंदू समाज को अपनी जड़ों की ओर देखना चाहिए जो सबको साथ लेकर चलने की बात करती हैं। उन्होंने युवा पीढ़ी को भी यह संदेश दिया कि वे संकीर्ण विचारधारा से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता में योगदान दें। कानून और नैतिकता के संगम पर बात करते हुए उन्होंने समझाया कि एकता केवल धार्मिक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक मजबूत राष्ट्र की नींव है।

सोशल मीडिया पर जस्टिस के बयान की चर्चा तेज

जस्टिस बीवी नागरत्ना के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। कई लोग इसे एक साहसिक और समय की जरूरत वाला बयान बता रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की एक सिटिंग जज द्वारा सामाजिक एकता की इस तरह की अपील समाज के लिए एक 'वेक-अप कॉल' की तरह है, जो हमें याद दिलाती है कि हमारी ताकत हमारी एकजुटता में ही निहित है।