"अगर ऐसा हुआ तो..." - नजम सेठी का बड़ा बयान, बताया किन 3 सूरतों में भारत पर परमाणु हमला कर सकता है पाकिस्तान

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भारत और पाकिस्तान... दो ऐसे पड़ोसी देश जिनके रिश्ते हमेशा से ही नाजुक और तनाव भरे रहे हैं। दोनों ही देश परमाणु हथियारों से लैस हैं, और यही बात दुनिया भर के लिए हमेशा एक चिंता का विषय बनी रहती है। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान कभी भारत के खिलाफ इन खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल करने की सोच भी सकता है?

अब, इसी गंभीर सवाल पर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के पूर्व चेयरमैन और जाने-माने पत्रकार, नजम सेठी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने दोनों देशों के राजनीतिक गलियारों में एक नई और गंभीर बहस छेड़ दी है। सेठी ने साफ-साफ उन तीन स्थितियों का जिक्र किया है, जिनमें, उनके अनुसार, पाकिस्तानी सेना भारत के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने का फैसला ले सकती है।

नजम सेठी के मुताबिक, ये हैं वो 3 खतरनाक सूरते-हाल:

  1. अगर भारत की सेना लाहौर पर कब्जा कर ले: सेठी का कहना है कि अगर हालात इतने बिगड़ जाएं कि भारतीय सेना हमला करके पाकिस्तान के दिल, यानी लाहौर शहर पर कब्जा करने की कगार पर पहुंच जाए, तो ऐसी सूरत में अपनी संप्रभुता बचाने के लिए पाकिस्तानी सेना परमाणु हमला करने से नहीं हिचकेगी।
  2. अगर भारत पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों को तबाह कर दे: उनकी दूसरी शर्त यह है कि अगर भारत पहले हमला करके पाकिस्तान के परमाणु हथियार के ठिकानों (Nuclear Installations) को ही नष्ट कर दे या करने की कोशिश करे, तो इसे एक बहुत बड़ा उकसावा माना जाएगा। तब, जो कुछ भी बचा है, उसके साथ पाकिस्तान जवाबी परमाणु हमला कर सकता है।
  3. अगर भारत की वजह से पाकिस्तान में विद्रोह हो जाए और देश टूटने लगे: सेठी की बताई गई तीसरी और सबसे पेचीदा स्थिति यह है कि अगर भारत अपनी नीतियों से पाकिस्तान के अंदर बगावत या ऐसे हालात पैदा कर दे, जिससे देश के टुकड़े होने का खतरा (जैसे 1971 में बांग्लादेश का बनना) पैदा हो जाए, तो अपनी एकता और अस्तित्व को बचाने की आखिरी कोशिश के तौर पर पाकिस्तान परमाणु हथियारों का बटन दबा सकता है।

क्या हैं इस बयान के मायने?

नजम सेठी कोई सरकारी अधिकारी नहीं हैं, लेकिन पाकिस्तान की सत्ता और सेना के गलियारों में उनकी अच्छी-खासी पैठ मानी जाती है। उनका यह बयान एक तरह से पाकिस्तान की उस 'अघोषित' परमाणु नीति को ही शब्दों में बयां करता है, जिसके बारे में अक्सर दबी जुबान में बात की जाती है।

यह बयान हमें याद दिलाता है कि भले ही दोनों देशों के बीच क्रिकेट या व्यापार की बातें होती रहें, लेकिन सीमा के उस पार एक ऐसी सोच भी मौजूद है जो अपनी आखिरी लड़ाई के लिए परमाणु हथियारों को एक विकल्प के तौर पर देखती है। हालांकि, यह जानना भी जरूरी है कि परमाणु युद्ध किसी भी देश के हित में नहीं है और इसका अंजाम दोनों ही मुल्कों के लिए भयानक तबाही के सिवा कुछ नहीं होगा।