No Cost EMI Scam: क्या सच में 'मुफ्त' है नो-कॉस्ट EMI? बिना ब्याज वाली किस्तों के पीछे छिपा है भारी नुकसान, खरीदारी से पहले जान लें ये 5 कड़वी बातें

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यूटिलिटी डेस्क, नई दिल्ली। आजकल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर मोबाइल, लैपटॉप या फर्नीचर खरीदते समय 'नो-कॉस्ट EMI' का विकल्प डिफॉल्ट बन गया है। बिना ब्याज के आसान किस्तों में भुगतान करने का वादा सुनने में तो बहुत शानदार लगता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बैंक या सेलर आपको मुफ्त में कर्ज क्यों देंगे?

हकीकत यह है कि जिसे आप 'जीरो परसेंट' ब्याज समझ रहे हैं, उसकी कीमत आप किसी न किसी दूसरे रूप में चुका रहे होते हैं। आइए जानते हैं कि इस 'नो-कॉस्ट' के पीछे का गणित आखिर काम कैसे करता है।

ब्याज नहीं, तो फिर पैसा कहां से वसूलती हैं कंपनियां?

टैक्समैनेजर.इन के फाउंडर और सीईओ दीपक कुमार जैन के अनुसार, नो-कॉस्ट EMI का मतलब यह कतई नहीं है कि ब्याज खत्म हो गया है। दरअसल, इसमें ब्याज की रकम को डिस्काउंट (Discount) के रूप में एडजस्ट किया जाता है। मान लीजिए 50,000 रुपये के फोन पर बैंक को 3,000 रुपये ब्याज चाहिए। ऐसे में सेलर फोन की कीमत से 3,000 रुपये का डिस्काउंट काट लेता है और आपको 47,000 रुपये का बिल देता है। बैंक आपसे पूरे 50,000 रुपये वसूलता है और बीच का 3,000 रुपये का अंतर ब्याज के तौर पर रख लेता है।

वो 'छिपे हुए' डिस्काउंट का खेल, जो आपको दिखता नहीं

अक्सर नो-कॉस्ट EMI चुनते ही आप उन फायदों से हाथ धो बैठते हैं जो फुल पेमेंट पर मिलते हैं।

कैशबैक का नुकसान: कई प्लेटफॉर्म पर एकमुश्त भुगतान करने पर ₹4,000 से ₹5,000 का सीधा डिस्काउंट या कार्ड कैशबैक मिलता है।

EMI की शर्त: जैसे ही आप EMI का विकल्प चुनते हैं, वह इंस्टेंट डिस्काउंट गायब हो जाता है या काफी कम हो जाता है। यानी किस्तों के चक्कर में आप पहले ही उस प्रोडक्ट की ज्यादा कीमत चुका चुके होते हैं।

प्रोसेसिंग फीस और GST का तगड़ा झटका

नो-कॉस्ट EMI में सिर्फ ब्याज ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य चार्जेज भी होते हैं जो पहली क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट आने पर पता चलते हैं:

प्रोसेसिंग फीस: बैंक खरीदारी को EMI में बदलने के लिए ₹199 से लेकर ₹500 तक की फीस लेते हैं।

GST की मार: भले ही ब्याज एडजस्ट कर दिया गया हो, लेकिन बैंक द्वारा लगाए गए काल्पनिक ब्याज वाले हिस्से पर 18% GST वसूला जाता है। ये छोटे-छोटे चार्ज मिलकर आपकी 'फ्री' डील को महंगा बना देते हैं।

क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है बुरा असर

हर नो-कॉस्ट EMI तकनीकी रूप से एक 'पर्सनल लोन' की तरह होती है।

क्रेडिट एक्सपोजर: यदि आपके पास एक साथ कई EMI चल रही हैं, तो आपका क्रेडिट एक्सपोजर बढ़ जाता है।

भविष्य के लोन पर असर: ज्यादा लोन लायबिलिटी होने के कारण भविष्य में होम लोन या कार लोन लेते समय आपकी पात्रता (Eligibility) कम हो सकती है। RBI भी बार-बार चेतावनी देता रहा है कि छोटे खर्चों के लिए कंज्यूमर क्रेडिट पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता ठीक नहीं है।

[Image showing a credit card statement with hidden charges like GST and Processing Fee highlighted in red]

कब चुनें नो-कॉस्ट EMI?

अगर फुल पेमेंट करने पर कोई एक्स्ट्रा डिस्काउंट नहीं मिल रहा है और आपका कैश फ्लो बिगड़ रहा है, तभी इसे चुनें। खरीदारी से पहले यह फॉर्मूला याद रखें: कुल भुगतान (EMI x महीने) + प्रोसेसिंग फीस + GST = वास्तविक कीमत।