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April 22 2026 12:01 pm

EVM के बटन पर गोंद या परफ्यूम लगाया तो खैर नहीं, चुनाव आयोग ने जारी की नई गाइडलाइन जानें क्या है पूरा मामला

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News India Live, Digital Desk: देश में चुनावी सरगर्मी के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदान प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक सख्त गाइडलाइन जारी की है। अक्सर चुनाव के दौरान ईवीएम (EVM) के साथ छेड़छाड़ या मतदान को प्रभावित करने की खबरें आती रहती हैं, लेकिन इस बार आयोग ने उन 'अजीबोगरीब' तरीकों पर नकेल कसने की तैयारी की है, जिनका इस्तेमाल प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार के वोट खराब करने के लिए किया जाता है। अब अगर किसी ने बैलेट यूनिट के बटनों के साथ कोई भी शरारत की, तो उसे सीधे जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

ईवीएम के बटनों पर क्यों है आयोग की नजर?

दरअसल, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में पिछले चुनावों के दौरान ऐसी शिकायतें मिली थीं कि कुछ असामाजिक तत्व या राजनीतिक कार्यकर्ता विपक्षी उम्मीदवारों के नाम वाले बटन पर गोंद (Glue), स्याही (Ink) या फिर तेज गंध वाला परफ्यूम लगा देते हैं। इसका मकसद मतदाताओं को भ्रमित करना या बटन को जाम करना होता है ताकि उस विशेष उम्मीदवार को वोट न मिल सके। निर्वाचन आयोग ने इसे चुनाव प्रक्रिया में गंभीर बाधा माना है।

क्या कहती है चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन?

आयोग ने सभी रिटर्निंग अधिकारियों और मतदान केंद्र के प्रभारी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे हर एक या दो घंटे के अंतराल पर EVM की बैलेट यूनिट की जांच करें। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि:

किसी भी बटन पर कोई चिपचिपा पदार्थ (गोंद या टेप) तो नहीं लगा है।

क्या किसी बटन को जानबूझकर स्याही से काला किया गया है।

बटन दबाने में किसी प्रकार की कठिनाई तो नहीं आ रही है।

सीसीटीवी और वीडियोग्राफी से होगी निगरानी

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्र के भीतर की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाएगी। यदि कोई मतदाता वोट डालने के बहाने ईवीएम के साथ ऐसी कोई भी हरकत करता पाया गया, तो उस पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मतदान केंद्रों पर वीडियोग्राफी और सीसीटीवी कैमरों की मदद ली जा रही है ताकि सबूत के तौर पर फुटेज मौजूद रहे।

मतदाताओं के लिए भी जरूरी सलाह

आयोग ने मतदाताओं से भी अपील की है कि वे मतदान कक्ष में प्रवेश करते समय केवल अपना वोट डालने पर ध्यान दें। यदि उन्हें ईवीएम मशीन पर कोई भी संदिग्ध पदार्थ या बटन जाम होने जैसी समस्या नजर आती है, तो वे तुरंत वहां मौजूद पीठासीन अधिकारी (Presiding Officer) को सूचित करें। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर मतदाता का वोट सही व्यक्ति तक पहुंचे और चुनावी निष्पक्षता बनी रहे।