"पति जो कहे, वही मानूं' वाली लड़की नहीं हूं मैं!" आकांक्षा रंजन कपूर ने बताया कैसे अच्छे पार्टनर ने बदली उनकी पूरी दुनिया

Post

अक्सर हम सोचते हैं कि प्यार कैसा होना चाहिए, लेकिन जब सही इंसान मिलता है, तो प्यार हमारी सोच को ही बदल देता है। कुछ ऐसा ही हुआ है एक्ट्रेस आकांक्षा रंजन कपूर के साथ, जिन्होंने हाल ही में अपने पार्टनर और अपनी खूबसूरत लव स्टोरी के बारे में खुलकर बात की है। 'जिगरा' फिल्म की एक्ट्रेस ने बताया कि कैसे सही प्यार ने उनकी जिंदगी को रोशन कर दिया है।

आकांक्षा ने बताया, "जब मैं अपने पार्टनर (फिल्म निर्माता शरण शर्मा) से मिली, तो सबसे पहली अच्छी बात यह थी कि उसके आस-पास हर कोई उससे बहुत प्यार करता था। लोग कहते थे, 'तुम दुनिया के सबसे खुशकिस्मत इंसान हो जो तुम्हें वो मिला'।"

वह आगे कहती हैं, "सच कहूं तो मुझे संभालना आसान नहीं है। मैं अपनी राय रखने वाली लड़की हूं, मैं 'ठीक है, मेरे पति जो भी कहें, वही मान लूं' वाली कैटेगरी में नहीं आती, और यह बात बहुत से मर्द बर्दाश्त नहीं कर पाते।"

आकांक्षा ने बताया कि कैसे उनके पार्टनर ने उनकी सोच बदल दी। "मेरी जिंदगी में हमेशा सीमाएं थीं – मेरी बहन, मेरे दोस्त, मेरा परिवार। मैं सोचती थी कि कोई लड़का मेरी दुनिया का केंद्र क्यों बने? लेकिन अब वे सारी सीमाएं न सिर्फ टूटी हैं, बल्कि खूबसूरती से पिघल गई हैं।"

आकांक्षा की बातें सुनकर लगता है कि एक अच्छा पार्टनर मिलना कितना ज़रूरी है। लेकिन सवाल ये है कि सही पार्टनर को पहचाना कैसे जाए? इसी सवाल का जवाब देती हैं मनोवैज्ञानिक श्रुति पाध्ये, जो बताती हैं कि लाइफ पार्टनर चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

 

पार्टनर चुनने के 5 गोल्डन रूल्स

1. शुरुआती 'चिंगारी' से ज्यादा जरूरी है इमोशनल समझदारी
किसी से मिलते ही एक 'स्पार्क' या 'चिंगारी' महसूस होना बहुत रोमांचक होता है, लेकिन रिश्ता चलाने के लिए यह काफी नहीं है। जो चीज लंबे समय तक रिश्ते को बनाए रखती है, वह है इमोशनल समझदारी। क्या आपका पार्टनर अपनी गलती मानकर ईमानदारी से माफी मांग सकता है? क्या वह बिना किसी पर दोष डाले झगड़ों को सुलझा सकता है? अगर नहीं, तो जिंदगी की असली मुश्किलों के सामने यह शुरुआती आकर्षण बहुत जल्दी फीका पड़ जाएगा।

2. शौक नहीं, सोच मिलनी चाहिए
अक्सर हम सोचते हैं कि अगर हमारे शौक (जैसे फिल्में देखना, घूमना) मिलते हैं, तो सब कुछ ठीक है। लेकिन शौक से ज्यादा जरूरी है 'सोच' का मिलना। क्या आप दोनों पैसे, परिवार, करियर और बच्चों की परवरिश जैसे बड़े मुद्दों पर एक जैसी राय रखते हैं? अगर इन बुनियादी बातों पर आपकी सोच अलग है, तो लंबे समय में तनाव पैदा होना तय है।

3. उसका 'खुद के साथ' कैसा रिश्ता है?
यह बहुत जरूरी है। कोई इंसान जो खुद के साथ खुश नहीं है, वह आपको भी खुश नहीं रख सकता। ध्यान दें कि वह अपने बारे में कैसे बात करता है, अपनी नाकामियों से कैसे निपटता है, और क्या वह अपनी भावनाओं को समझता है? जो इंसान खुद को लेकर जागरूक होता है, वह अपनी समस्याएं आप पर नहीं थोपेगा और आपके मुश्किल समय में आपका साथ देगा।

4. उनके साथ होने पर आपको कैसा 'महसूस' होता है?
कभी-कभी हमारा शरीर उन बातों को महसूस कर लेता है, जिन्हें हमारा दिमाग नहीं समझ पाता। ध्यान दें कि जब आप उनके साथ होते हैं, तो क्या आप शांत, सुरक्षित और सहज महसूस करते हैं? या आप लगातार बेचैन रहते हैं, खुद को साबित करने की कोशिश करते हैं या इस डर में रहते हैं कि कहीं कुछ गलत न कह दें? अगर आपको उनके साथ सुकून महसूस नहीं होता, तो यह एक बड़ा 'रेड फ्लैग' है।

5. पुराने रिश्तों की कहानी क्या कहती है?
इसका मतलब यह नहीं है कि आप उनके पिछले पार्टनर्स को गिनें। बल्कि यह समझना है कि उन्होंने अपने पिछले रिश्तों को कैसे संभाला। क्या वे ब्रेकअप के लिए खुद भी कोई जिम्मेदारी लेते हैं, या हर बार अपने पुराने साथी को ही 'पागल' या 'गलत' ठहरा देते हैं? जो इंसान अपनी गलतियों से नहीं सीखता, वह वही गलतियां आपके साथ भी दोहरा सकता है।

सोनाक्षी सिन्हा भी मानती हैं कि पार्टनर में 'रेड फ्लैग्स' और 'ग्रीन फ्लैग्स' पहचानना बहुत जरूरी है। आखिरकार, सही पार्टनर चुनना सिर्फ दिल का नहीं, बल्कि थोड़ी समझदारी का भी काम है।