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April 14 2026 02:29 pm

Hydrophobia Symptoms : क्या रेबीज का मरीज सच में कुत्ते की तरह भौंकने लगता है? न्यूरोलॉजिस्ट से जानें पीछे की सच्चाई

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News India Live, Digital Desk: रेबीज एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवर (विशेषकर कुत्ते) के काटने से फैलती है। ग्रामीण इलाकों और सोशल मीडिया पर अक्सर यह दावा किया जाता है कि रेबीज से पीड़ित इंसान कुत्ते की तरह भौंकने लगता है या उसकी हरकतें पूरी तरह जानवरों जैसी हो जाती हैं। लेकिन क्या इस बात में कोई वैज्ञानिक सच्चाई है? देश के जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट ने इस मिथक पर से पर्दा उठाया है और रेबीज के वास्तविक लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया है।

क्या मरीज वाकई 'भौंकता' है? डॉक्टर का जवाब

न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, यह एक पूरी तरह से गलत धारणा (Myth) है कि रेबीज का मरीज कुत्ते की तरह भौंकता है। असल में, इसके पीछे का कारण शारीरिक है न कि व्यवहारिक।

गले की मांसपेशियों में ऐंठन: रेबीज के अंतिम चरणों में मरीज के गले की मांसपेशियों (Laryngeal muscles) में तीव्र ऐंठन और लकवा होने लगता है।

आवाज में बदलाव: जब मरीज सांस लेने या बोलने की कोशिश करता है, तो गले की इस जकड़न के कारण उसके मुंह से निकलने वाली आवाज सामान्य नहीं रह जाती। यह आवाज कर्कश और टूटी-फूटी होती है, जिसे सुनकर अनजाने में लोग इसे 'भौंकने' जैसी आवाज समझ लेते हैं।

रेबीज के वास्तविक और डरावने लक्षण

रेबीज का वायरस सीधे इंसान के सेंट्रल नर्वस सिस्टम (दिमाग और रीढ़ की हड्डी) पर हमला करता है। इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:

हाइड्रोफोबिया (Hydrophobia): यह रेबीज का सबसे पहचान योग्य लक्षण है। मरीज को पानी देखने या पीने से डर लगने लगता है। पानी गले से नीचे उतारने की कोशिश करने पर उसे असहनीय दर्द और ऐंठन होती है।

एयरोफोबिया (Aerophobia): मरीज को ताजी हवा या पंखे की हवा के झोंकों से भी डर और बेचैनी होने लगती है।

अत्यधिक लार बहना (Excessive Salivation): निगलने की क्षमता खत्म होने के कारण मरीज के मुंह में लार जमा होने लगती है और वह बाहर गिरने लगती है।

भ्रम और आक्रामकता: मरीज काफी चिड़चिड़ा हो जाता है, उसे भ्रम (Hallucinations) होने लगते हैं और वह आक्रामक व्यवहार कर सकता है।

बचाव ही एकमात्र इलाज है

डॉक्टरों का कहना है कि एक बार रेबीज के लक्षण दिखने शुरू हो जाएं, तो इसका कोई इलाज संभव नहीं है और यह लगभग 100% जानलेवा साबित होता है। इसलिए:

तुरंत टीकाकरण: कुत्ते या किसी जंगली जानवर के काटने के तुरंत बाद (बिना लक्षणों का इंतजार किए) एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) लगवाना अनिवार्य है।

घाव की सफाई: काटने वाली जगह को तुरंत बहते पानी और साबुन से कम से कम 10-15 मिनट तक धोएं।

पालतू जानवरों का टीकाकरण: अपने पालतू कुत्तों और बिल्लियों का समय पर टीकाकरण करवाएं।