Humanity shamed : बांग्लादेश में 7 महीनों में 306 बच्चियों से रेप, पिछले साल का रिकॉर्ड भी टूटा
News India Live, Digital Desk: Humanity shamed : बांग्लादेश से इंसानियत को झकझोर देने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं। इस साल यानी 2025 के पहले सात महीनों में ही 306 मासूम बच्चियों को बलात्कार जैसी दरिंदगी का शिकार होना पड़ा है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक समाज के तौर पर गहरी चिंता का विषय है। हालत इतनी गंभीर है कि इस साल के सात महीनों का यह आंकड़ा, पिछले पूरे साल 2024 में दर्ज हुए कुल 234 मामलों को भी पार कर गया है।
यह सोचना भी दिल दहला देता है कि इस हैवानियत का शिकार सबसे ज्यादा मासूम बच्चे हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इन 306 बच्चियों में से 49 की उम्र तो सिर्फ 0 से 6 साल के बीच थी। 94 बच्चियां 7 से 12 साल की थीं और 103 किशोरियां थीं। यह दिखाता है कि अपराधी किस कदर बेखौफ हैं और मासूमियत को अपना निशाना बना रहे हैं।
सिर्फ बच्चियां ही नहीं, बच्चे भी हैं शिकार
यह संकट सिर्फ लड़कियों तक ही सीमित नहीं है। इसी दौरान 30 लड़कों के भी यौन शोषण का शिकार होने की खबर है।] इसके अलावा, 129 बच्चियों के साथ बलात्कार की कोशिश की गई। ये घटनाएं घरों के बाहर भी हो रही हैं; 49 लड़कियों को सरेराह छेड़छाड़ का सामना करना पड़ा, जबकि 22 मामलों में शिक्षक जैसे भरोसेमंद लोगों ने ही अपनी मर्यादा तोड़ी।
क्यों दबी रह जाती हैं चीखें?
यह समस्या जितनी दिख रही है, उससे कहीं ज्यादा गहरी है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ये तो सिर्फ वो मामले हैं जो किसी तरह दर्ज हो पाए। आज भी समाज में बदनामी का डर, परिवार पर दबाव और एक कमजोर कानूनी व्यवस्था के चलते कई परिवार चुप रह जाते हैं। पीड़ितों को इंसाफ के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और कई बार आरोपी अपने प्रभाव के चलते बच निकलते हैं, जिससे बाकी लोगों की हिम्मत भी टूट जाती है। रिपोर्ट किए गए 306 मामलों में से केवल 251 में ही कानूनी केस दर्ज हो पाया, जिसका मतलब है कि 55 बच्चियों को तो न्याय की चौखट पर पहुंचने का मौका भी नहीं मिला।
यह भयावह स्थिति बांग्लादेश में बच्चों की सुरक्षा पर एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा करती है। मानवाधिकार कार्यकर्ता लगातार बेहतर और सख्त कानूनों की मांग कर रहे हैं ताकि इन मासूमों की मुस्कान को इस तरह कुचला न जा सके।