सैलरी बंद होने के बाद घर कैसे चलेगा? एन्युटी (Annuity) या SWP—रिटायरमेंट के लिए कौन है असली 'बुढ़ापे की लाठी'?
नौकरी गई, पर खर्चे नहीं: रिटायरमेंट की शाम जितनी सुकून भरी होती है, पैसों की चिंता उसे उतना ही डरावना बना सकती है। हर किसी के मन में यही सवाल होता है-"अब हर महीने 1 तारीख को अकाउंट में पैसा कहाँ से आएगा?"
अगर आप भी रिटायरमेंट के करीब हैं या अभी से प्लानिंग कर रहे हैं, तो बाज़ार में दो सबसे पक्के विकल्प हैं: 1. एन्युटी (Annuity) और 2. सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP)। दोनों का मकसद आपकी जेब भरना है, लेकिन काम करने का तरीका ज़मीन-आसमान का फर्क रखता है। आइये समझते हैं कि आपके लिए क्या बेस्ट है।
1. एन्युटी (Annuity): सुकून वाली 'फिक्स्ड' पेंशन
एन्युटी को आप एक 'बीमा कंपनी के साथ पक्के वादे' की तरह समझें।
- कैसे काम करता है: आपने अपनी जमा-पूंजी (एकमुश्त रकम) कंपनी को दी और कंपनी ने वादा किया कि वह आपको ताउम्र हर महीने एक तय रकम देगी।
- सबसे बड़ा फायदा (शांति): चाहे शेयर बाजार गिरे या आसमान छुए, आपकी पेंशन पर कोई आंच नहीं आएगी। आपको पता होगा कि राशन, बिजली बिल और दवाइयों का खर्चा इस पैसे से निकल जाएगा।
- कमी क्या है: सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि एक बार पैसा दे दिया, तो वह लॉक (Lock) हो जाता है। आप उसे इमरजेंसी में निकाल नहीं सकते। दूसरी बात, महंगाई (Inflation) हर साल बढ़ती है, लेकिन आपकी पेंशन उतनी ही रहती है। जो 10,000 रुपये आज काफी हैं, 10 साल बाद वो ऊंट के मुंह में जीरा लगेंगे।
2. एसडब्ल्यूपी (SWP): चाबी आपके हाथ में
यह म्यूचुअल फंड का एक स्मार्ट फीचर है। इसमें पैसा एक जगह जाम नहीं होता, बल्कि काम करता रहता है।
- कैसे काम करता है: आप म्यूचुअल फंड में पैसा निवेश करते हैं और खुद तय करते हैं कि "मुझे हर महीने 20 हज़ार रुपये चाहिए"। फंड आपके यूनिट्स बेचकर आपको पैसा देता रहता है, जबकि बाकी बचा हुआ पैसा बाजार में बढ़ता रहता है।
- फायदा (Flexibility): मान लीजिये खर्चे बढ़ गए, तो आप जब चाहे विड्रॉल की रकम बढ़ा सकते हैं या जरूरत न हो तो रोक सकते हैं। चूंकि पैसा म्यूचुअल फंड में है, यह महंगाई को मात देने (Beat Inflation) की ताकत रखता है। साथ ही, पैसे पर आपका पूरा हक (Control) रहता है।
- डर क्या है: इसका सीधा कनेक्शन बाज़ार से है। अगर मार्किट लंबे समय तक गिरा रहा, तो आपके फंड की वैल्यू कम हो सकती है और आपकी रेगुलर इनकम प्रभावित हो सकती है।
टैक्स का खेल: किसकी जेब भारी?
जब बात टैक्स की आती है, तो SWP बाज़ी मार जाता है।
- एन्युटी: इससे मिलने वाला पैसा आपकी 'सैलरी' माना जाता है और इस पर टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।
- SWP: इस पर 'कैपिटल गेंस' का नियम लागू होता है। अगर आपका पैसा इक्विटी फंड में है, तो साल भर में 1.25 लाख रुपये तक का मुनाफा टैक्स-फ्री है। उससे ऊपर सिर्फ़ 12.5% टैक्स लगता है। जो लोग कम टैक्स स्लैब में आते हैं, उनके लिए यह बहुत फायदेमंद है।
निष्कर्ष: आपको क्या चुनना चाहिए? (Expert Advice)
अब सवाल उठता है-इधर कुआँ, उधर खाई, तो जाएं कहाँ?
फाइनेंशियल एडवाइजर्स कहते हैं कि समझदारी "हाइब्रिड एप्रोच" (Hybrid Approach) यानी बीच का रास्ता अपनाने में है।
- बेसिक खर्चे (Basic Needs): अपने खाने-पीने और बिल भरने लायक पैसा 'एन्युटी' में डाल दें, ताकि जीवन में रिस्क न रहे।
- लाइफस्टाइल और महंगाई: बाकी बचा पैसा 'SWP' में डालें। यह पैसा समय के साथ बढ़ेगा, जिससे आप महंगाई से लड़ पाएंगे और कभी-कभार घूमने-फिरने का शौक भी पूरा कर सकेंगे।
तो, अपने 'रिटायरमेंट के गोल' को पहचानें और सूझबूझ से अपना पोर्टफोलियो तैयार करें!