प्राइवेसी की लूट पर लगाम, स्मार्टफोन की उस चालाकी को कैसे रोकें जिससे उसे सब पता चल जाता है?
News India Live, Digital Desk: आप जो भी बातचीत करते हैं, ऐप्स उसे 'सर्च प्रेफरेंस' में बदलने की कोशिश करते हैं। असल में हम कई बार जाने-अनजाने में ऐप्स को माइक्रोफोन की इजाज़त (Permission) दे देते हैं। ये ऐप्स बैकग्राउंड में चलते रहते हैं और हमारी बातचीत के 'कीवर्ड्स' (Keywords) को पकड़ लेते हैं। इसी वजह से आपको आपकी पसंद के विज्ञापनों का हमला झेलना पड़ता है।
कैसे रोकें इस 'डिजिटल जासूसी' को?
प्राइवेसी बचाने का तरीका आपके फोन की सेटिंग में ही छिपा है। आपको बस कुछ कदम उठाने हैं:
- गूगल की 'हिसाब-किताब' सेटिंग: अपने फोन की 'Settings' में जाएँ और 'Google' पर क्लिक करें। यहाँ 'Manage your Google Account' में 'Data & Privacy' सेक्शन ढूंढें। इसमें एक ऑप्शन होता है 'Personalized Ads' या 'Ad Settings'। इसे बंद (Off) कर दें। यह गूगल को आपकी व्यक्तिगत बातों के आधार पर प्रोफाइलिंग करने से रोकता है।
- माइक्रोफोन की मनमानी खत्म करें: कई ऐप्स को माइक की ज़रूरत नहीं होती (जैसे कोई वॉलपेपर ऐप या कैलकुलेटर), फिर भी वे इसे चालू रखते हैं। अपने फोन की 'Privacy' या 'Apps' सेटिंग्स में जाकर 'Permission Manager' में देखें कि कौन-कौन से ऐप आपका माइक इस्तेमाल कर रहे हैं। बेवजह के ऐप्स के लिए 'Deny' या 'Don't Allow' कर दें।
- वॉइस असिस्टेंस पर लगाम: अगर आप 'Hey Google' या 'Hey Siri' का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल नहीं करते, तो बेहतर है कि आप इनके 'Listen' फीचर को बंद कर दें। जब फोन हमेशा ये सुनने के लिए तैयार रहता है कि आप कब उसे पुकारेंगे, तो इसका सीधा असर आपकी बैटरी पर पड़ता है और यह लगातार आपकी आवाज़ ट्रैक करता है।
बैटरी को भी होगा फायदा
जब आप इन बैकग्राउंड सेटिंग्स और परमिशन्स को बंद करते हैं, तो आपका फोन अंदर ही अंदर होने वाली प्रोसेसिंग रोक देता है। इसका सीधा मतलब है—लंबा बैटरी बैकअप और फोन का कम गर्म होना।
मेरी एक छोटी सी सलाह:
टेक्नोलॉजी को अपने लिए इस्तेमाल करें, खुद को इसके लिए 'ओपन' न छोड़ें। कभी-कभी ऐप्स को अपडेट करने के बाद वे दोबारा ये परमिशन्स मांगते हैं, तो हर महीने एक बार अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को चेक करना एक अच्छी आदत है। आपकी निजी बातें सिर्फ़ आपके और आपके दोस्त के बीच रहनी चाहिए, न कि किसी मार्केटिंग सर्वर के पास।