मलबे और दर्द के बीच जगी उम्मीद क्या 2025 में गाजा और बेथलहम में वापस लौट रही है क्रिसमस की रौनक?
News India Live, Digital Desk : दिसंबर का महीना आते ही हमारे आसपास केक, लाइट्स और क्रिसमस ट्री की चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन, दुनिया के एक हिस्से में यह त्यौहार सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि अस्तित्व और उम्मीद की लड़ाई है। हम बात कर रहे हैं बेथलहम और गाजा की।
साल 2025 का दिसंबर एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है। ख़बरें हैं कि गाजा और बेथलहम में क्रिसमस की कुछ रस्में वापस लौट रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह जगह इतनी ख़ास क्यों है और आज वहां एक दिया जलाना भी इतना मायने क्यों रखता है?
बेथलहम: वो छोटा सा शहर जिसने दुनिया बदल दी
बेथलहम, जिसे आज हम वेस्ट बैंक (फिलिस्तीन) में देखते हैं, ईसाई धर्म का सबसे पवित्र केंद्र माना जाता है। इतिहास गवाह है कि इसी छोटे से शहर में प्रभु यीशु (Jesus Christ) का जन्म हुआ था। बाइबिल की कहानियों में आपने पढ़ा होगा कि कैसे एक तारे (Star of Bethlehem) ने रास्ता दिखाया था।
यहाँ मौजूद 'चर्च ऑफ नेटिविटी' (Church of the Nativity) दुनिया के सबसे पुराने चर्चों में से एक है। माना जाता है कि यह चर्च ठीक उसी जगह बना है, जहाँ अस्तबल में यीशु का जन्म हुआ था। हर साल यहाँ दुनिया भर से लोग सिर्फ उस जमीन को चूमने आते थे।
गाजा में क्रिसमस: अंधेरे में रोशनी की तलाश
गाजा, जो पिछले कुछ समय से सिर्फ़ तबाही और जंग की खबरों में रहा है, वहां क्रिसमस 2025 का जिक्र होना अपने आप में एक भावुक पल है। यहाँ रहने वाले छोटे से ईसाई समुदाय के लिए क्रिसमस मनाना आसान नहीं रहा है। कई बार त्यौहार रद्द हुए, तो कई बार सन्नाटे में प्रार्थनाएं की गईं।
लेकिन इस बार जब 'क्रिसमस की वापसी' की बात हो रही है, तो इसका मतलब सजावट या पार्टी नहीं है। इसका मतलब है—जिंदा रहने का जज्बा। मलबे के बीच अगर कोई प्रार्थना के लिए हाथ जोड़ रहा है, तो वो दुनिया को शांति का सबसे बड़ा संदेश दे रहा है।
इतिहास और आज का सच
बेथलहम का इतिहास हज़ारों साल पुराना है। यह सिर्फ़ ईसा मसीह का जन्मस्थान नहीं है, बल्कि यहूदी धर्म में भी राजा डेविड का शहर माना जाता है। आज के दौर में, जब यहाँ शांति कम और तनाव ज्यादा दिखता है, तब भी इस शहर की दीवारों में इतिहास धड़कता है।
2025 का क्रिसमस यहाँ के लोगों के लिए सिर्फ़ एक तारीख नहीं, बल्कि एक मौका है दुनिया को याद दिलाने का कि नफरत कितनी भी हो, उम्मीद हमेशा एक नन्हें बच्चे की तरह जन्म ले ही लेती है—ठीक वैसे ही जैसे दो हज़ार साल पहले बेथलहम में हुआ था।