Holi 2026: नवाबों के शहर लखनऊ में होली पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का साया! जानें 3 या 4 मार्च, कब खेलना शुभ होगा रंग?
लखनऊ। तहजीब और नवाबों के शहर लखनऊ में इस बार होली के हुड़दंग और उल्लास के बीच 'भद्रा' और 'चंद्र ग्रहण' की जुगलबंदी ने त्योहार की तारीखों को लेकर बड़ा सस्पेंस पैदा कर दिया है। पंचांग की गणनाओं और ज्योतिषीय फेर के कारण आम जनता में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी कि आखिर रंगों वाली होली (Dhulandi) कब खेली जाएगी। हालांकि, शहर के दिग्गज विद्वानों और ज्योतिषाचार्यों ने अब इस तस्वीर को पूरी तरह साफ कर दिया है। शास्त्रों के अनुसार, इस बार 3 मार्च को नहीं बल्कि 4 मार्च को रंगोत्सव मनाना ही सबसे श्रेष्ठ और मंगलकारी होगा।
भद्रा और ग्रहण का 'डेडली कॉम्बिनेशन': क्यों बदला मुहूर्त?
लखनऊ के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल और पंडित राकेश पांडेय के अनुसार, इस साल होलिका दहन और रंगों की होली के बीच भद्रा का लंबा साया मंडरा रहा है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 की शाम 05:18 बजे से शुरू हो रही है, लेकिन इसके साथ ही भद्रा भी सक्रिय हो जाएगी। चूंकि भद्रा काल में कोई भी शुभ कार्य या दहन वर्जित माना जाता है, इसलिए होलिका दहन के समय में बड़ा बदलाव हुआ है।
होलिका दहन का सबसे सटीक और शुभ समय
विद्वानों का मत है कि भद्रा मुख में दहन करना भारी अनिष्ट का कारक हो सकता है। ऐसे में लखनऊ वासियों के लिए होलिका दहन के दो विशेष मुहूर्त निकलकर आए हैं:
पहला विकल्प (भद्रा पुच्छ काल): 2 मार्च की देर रात 12:50 बजे से 02:02 बजे के बीच।
दूसरा विकल्प (भद्रा समाप्ति के बाद): 3 मार्च की भोर में 04:56 बजे के बाद।
पंडितों का कहना है कि भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा ही दहन के लिए सर्वोत्तम होती है, जो इस बार काफी पेचीदा संयोग बना रही है।
3 मार्च को क्यों नहीं खेली जाएगी होली?
शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि होती है, उसी दिन रंगों की होली यानी धुलेंडी मनाई जाती है। 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि का विस्तार और ग्रहण का प्रभाव होने के कारण विद्वानों ने 4 मार्च को होली खेलने की सलाह दी है। इसके पीछे तर्क यह है कि 4 मार्च को उदय तिथि के अनुसार रंगों का उत्सव मनाना पूरी तरह शास्त्र सम्मत और दोषमुक्त होगा। लखनऊ के चौक से लेकर गोमती नगर तक के प्रमुख बाजारों में भी अब 4 मार्च की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है।
चंद्र ग्रहण का असर और सूतक काल
होली के साथ-साथ इस बार चंद्र ग्रहण की छाया भी श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय है। हालांकि, ज्योतिषियों का कहना है कि यदि ग्रहण भारत में दृश्य (Visible) नहीं होगा, तो इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। फिर भी, धार्मिक आस्था के चलते कई लोग सावधानी बरत रहे हैं। लखनऊ के प्रसिद्ध मंदिरों के कपाट भी ग्रहण और भद्रा के नियमों के अनुसार ही खुलेंगे और बंद होंगे। शहरवासियों को सलाह दी गई है कि वे भद्रा काल में दहन से बचें ताकि सुख-समृद्धि का आगमन हो सके।