Holashtak 2026 : कब से लग रहा है होलाष्टक? शादी-ब्याह और मुंडन पर लगेगा 8 दिनों का बैन, जानें इसके पीछे की बड़ी वजह
News India Live, Digital Desk: फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लेकर पूर्णिमा (होलिका दहन) तक के समय को होलाष्टक कहा जाता है। साल 2026 में होलाष्टक की शुरुआत 25 फरवरी से हो रही है, जो 4 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगी। हिंदू धर्म में इन 8 दिनों को अशुभ माना जाता है और इस दौरान किसी भी तरह के मांगलिक कार्यों की सख्त मनाही होती है।
क्यों वर्जित हैं शुभ कार्य? (ज्योतिषीय कारण)
होलाष्टक के दौरान ग्रहों का स्वभाव काफी उग्र और नकारात्मक हो जाता है। ज्योतिष गणना के अनुसार, इन 8 दिनों में अलग-अलग ग्रह अपनी नीच राशि या प्रतिकूल स्थिति में होते हैं:
अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र रहते हैं।
ग्रहों के इस नकारात्मक प्रभाव के कारण इस समय शुरू किया गया कोई भी नया कार्य सुखद परिणाम नहीं देता।
होलाष्टक में भूलकर भी न करें ये 5 काम:
विवाह संस्कार: इन दिनों शादी-ब्याह करने से वैवाहिक जीवन में कलह की आशंका रहती है।
गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश या निर्माण कार्य शुरू करना वर्जित है।
मुंडन और नामकरण: बच्चों के संस्कार इस अवधि में टाल दिए जाते हैं।
नया बिजनेस: नई दुकान खोलना या बड़ा निवेश करना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
वाहन खरीद: नई गाड़ी या कीमती आभूषण खरीदना भी शुभ नहीं माना जाता।
पौराणिक कथा: प्रह्लाद की यातनाओं का समय
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र और भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को इन 8 दिनों तक भीषण यातनाएं दी थीं। प्रह्लाद की भक्ति की रक्षा स्वयं नारायण ने की थी, लेकिन उन कष्टों की याद में इस समय को शोक और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, उत्सव का नहीं।
होलाष्टक में क्या करना है शुभ?
भले ही मांगलिक कार्य वर्जित हों, लेकिन भक्ति और साधना के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ है।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना आरोग्य प्रदान करता है।
हनुमान चालीसा का पाठ नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है।
दान-पुण्य करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं।