लंका में हनुमान जी ने दिखाए थे ये 9 अद्भुत चमत्कार,जिनसे कांप उठा था रावण का सिंहासन
News India Live, Digital Desk : रामायण की कथा में 'सुंदरकांड' वह अध्याय है जहाँ हनुमान जी की वीरता और अलौकिक शक्तियों का सबसे भव्य वर्णन मिलता है। जब पवनपुत्र ने 100 योजन का समुद्र लांघकर लंका की धरती पर कदम रखा, तो वहां एक के बाद एक कई ऐसे चमत्कार हुए जिन्हें देख राक्षस सेना भयभीत हो गई थी। आइए जानते हैं हनुमान जी के उन 9 चमत्कारों के बारे में जिन्होंने रावण की सोने की लंका को हिलाकर रख दिया था।
1. सुरसा और सिंहिका का वध
समुद्र पार करते समय हनुमान जी ने अपना आकार बढ़ाकर और फिर अत्यंत छोटा रूप धरकर सुरसा के मुख से बाहर निकलकर अपनी चतुराई दिखाई। वहीं, छाया पकड़ने वाली राक्षसी सिंहिका का वध कर उन्होंने अपनी अपार शक्ति का परिचय दिया।
2. लंकिनी पर विजय
लंका के द्वार पर पहरा दे रही लंकिनी को मात्र एक मुष्ठिका (मुक्का) प्रहार से परास्त कर हनुमान जी ने लंका में प्रवेश किया। यह इस बात का संकेत था कि रावण के पाप का घड़ा भर चुका है।
3. विभीषण से भेंट और सूक्ष्म रूप
राक्षसों के बीच भगवान के भक्त विभीषण को खोज निकालना और उनके सामने अत्यंत सूक्ष्म रूप में प्रकट होना हनुमान जी की बुद्धिमत्ता का प्रमाण था।
4. अशोक वाटिका का विध्वंस
माता सीता की अनुमति पाकर हनुमान जी ने रावण की सबसे प्रिय अशोक वाटिका को उजाड़ दिया। उन्होंने न केवल पेड़ों को उखाड़ा बल्कि वहां मौजूद रक्षकों को भी धूल चटा दी।
5. अक्षय कुमार का वध
रावण के पराक्रमी पुत्र अक्षय कुमार को युद्ध में मारकर हनुमान जी ने रावण को पहली बार गहरे शोक और डर में डाल दिया था।
6. ब्रह्मपाश का सम्मान
जब मेघनाद ने हनुमान जी पर ब्रह्मास्त्र (ब्रह्मपाश) चलाया, तो हनुमान जी चाहते तो उसे विफल कर सकते थे, लेकिन ब्रह्मा जी के अस्त्र का मान रखने के लिए उन्होंने स्वयं को बंदी बनवा लिया।
7. रावण की सभा में निर्भीकता
बंदी होने के बावजूद रावण की भरी सभा में हनुमान जी ने अपनी पूंछ का आसन बनाकर रावण से भी ऊंचे स्थान पर बैठकर उसके अहंकार को तोड़ा और उसे धर्म का मार्ग दिखाया।
8. पूंछ की बढ़ती लंबाई
जब राक्षसों ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने की कोशिश की, तो उन्होंने अपनी योगशक्ति से पूंछ की लंबाई इतनी बढ़ा दी कि लंका का सारा कपड़ा और घी कम पड़ गया।
9. लंका दहन: सोने की लंका राख में तब्दील
सबसे बड़ा चमत्कार तब हुआ जब जलती हुई पूंछ के साथ हनुमान जी ने एक महल से दूसरे महल छलांग लगाकर पूरी सोने की लंका को जलाकर भस्म कर दिया, लेकिन विभीषण का घर और अशोक वाटिका पूरी तरह सुरक्षित रहे।