History of Asafoetida : जो हर भारतीय खाने की जान है, वो असल में भारत की है ही नहीं, जानिए कैसे पहुँची आपके किचन तक

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News India Live, Digital Desk: हमारे किचन में हींग की एक छोटी सी डिब्बी हमेशा रहती है। दाल में तड़का लगाना हो या सब्ज़ी में स्वाद बढ़ाना हो, एक चुटकी हींग अपना जादू चला ही देती है। इसकी तेज़, अनोखी महक के बिना कई भारतीय व्यंजनों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि जिस हींग को आप इतना 'देसी' समझते हैं, वो असल में भारत की है ही नहीं, तो शायद आपको यकीन न हो।

जी हाँ, यह सच है! हींग का पौधा भारत में उगता ही नहीं था। यह ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और उज़्बेकिस्तान जैसे मध्य एशियाई देशों के ठंडे और सूखे पहाड़ी इलाकों की देन है। सदियों से भारत हींग का सबसे बड़ा खरीदार रहा है, लेकिन इसका उत्पादन कभी यहाँ नहीं हुआ। दुनिया में पैदा होने वाली कुल हींग का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत में इस्तेमाल होता है। तो सवाल यह उठता है कि यह विदेशी मसाला हमारी रसोई का इतना अहम हिस्सा कैसे बन गया?

हज़ारों साल पुराना है भारत से हींग का रिश्ता

हींग के भारत आने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसे सिकंदर की सेना अपने साथ लाई थी। वहीं, कई पुराने बौद्ध और हिन्दू ग्रंथों में भी हींग का ज़िक्र मिलता है, जिससे पता चलता है कि यह लगभग 600 ईसा पूर्व के आस-पास ही अफ़ग़ानिस्तान के रास्ते भारत पहुँच चुकी थी।

मुग़ल काल में तो हींग का इस्तेमाल शाही रसोई में जमकर होता था। सम्राट अकबर के मंत्री अबुल फ़ज़ल ने अपनी किताब 'आइन-ए-अकबरी' में भी लिखा है कि शाही पकवानों में हींग का उपयोग किया जाता था। उस समय आगरा हींग का एक बहुत बड़ा बाज़ार हुआ करता था। अफ़ग़ानिस्तान से हींग भेड़ों की खाल में भरकर आती थी, जिससे आगरा में चमड़े का उद्योग भी खूब फला-फूला।

क्यों और कैसे भारतीय खाने में रच-बस गई हींग?

भारत में बहुत से समुदाय, जैसे जैन और कई ब्राह्मण परिवार, प्याज और लहसुन नहीं खाते। ऐसे में हींग ने उनकी रसोई में एक बेहतरीन विकल्प का काम किया। जब गर्म तेल या घी में हींग का तड़का लगता है, तो उससे जो महक उठती है, वो काफी हद तक प्याज-लहसुन जैसी होती है और खाने को एक गहरा स्वाद देती है। इसके अलावा, आयुर्वेद में हींग को पाचन के लिए बहुत अच्छा माना गया है, जिस वजह से भी इसे दाल और पेट में गैस बनाने वाली सब्जियों में खासतौर पर डाला जाता है।

अब भारत में भी उग रही है हींग: एक नई शुरुआत

दशकों से हम अपनी ज़रूरत की सारी हींग विदेशों से मंगाते रहे हैं, जिस पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। लेकिन अब यह कहानी बदल रही है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशों के तहत वैज्ञानिकों ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

साल 2020 में पहली बार भारत में हींग की खेती की शुरुआत हुई। हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जैसे ठंडे रेगिस्तानी इलाके की मिट्टी और जलवायु को इसकी खेती के लिए बिलकुल सही पाया गया। वैज्ञानिकों ने ईरान और अफ़ग़ानिस्तान से बीज मंगाकर पौधे तैयार किए और अब यहाँ के किसान हींग उगा रहे हैं। हींग के पौधे को पूरी तरह तैयार होने में लगभग पांच साल लगते हैं, जिसके बाद उसकी जड़ों से निकलने वाले रस से हींग तैयार होती है। यह भारत के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, जिससे आने वाले समय में हमारी विदेशी निर्भरता कम होगी और किसानों को भी फायदा मिलेगा।

तो अगली बार जब आप दाल में हींग का तड़का लगाएं, तो याद रखिएगा कि उस एक चुटकी में हज़ारों सालों का इतिहास, व्यापार और अब आत्मनिर्भर भारत की महक भी शामिल है।