Hindu Rituals : जाने-अनजाने में हुई भूल की माफी का दिन है ऋषि पंचमी, जानें क्यों है ये व्रत महिलाओं के लिए ख़ास

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News India Live, Digital Desk: Hindu Rituals : हर साल गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है. यह दिन किसी देवी-देवता को नहीं, बल्कि हमारे महान सप्तर्षियों यानी सात ऋषियों को समर्पित है. यह व्रत खासतौर पर महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से महिलाओं को मासिक धर्म (Menstruation) के दौरान जाने-अनजाने में हुई गलतियों से लगे दोष से मुक्ति मिल जाती है.

क्यों रखा जाता है ऋषि पंचमी का व्रत?

पुराने समय में, मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को लेकर कुछ सख्त नियम बनाए गए थे. उन्हें रसोई में जाने, पूजा-पाठ करने या पानी के बर्तनों को छूने की मनाही होती थी. ऐसा माना जाता था कि अगर कोई महिला इन नियमों का पालन नहीं करती, तो उसे दोष लगता है. ऋषि पंचमी का व्रत इसी दोष से मुक्ति पाने के लिए किया जाता है. यह व्रत महिलाओं से अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगने का एक माध्यम है. हालांकि, आज के समय में ये मान्यताएं बदल रही हैं, लेकिन यह व्रत एक परंपरा के तौर पर आज भी कायम है.

क्या है इस व्रत की पौराणिक कथा?

इस व्रत के पीछे एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है. पौराणिक कथा के अनुसार, विदर्भ देश में उत्तंक नाम का एक सदाचारी ब्राह्मण अपनी पत्नी सुशीला के साथ रहता था. उनके एक बेटा और एक बेटी थी. बेटी का विवाह एक अच्छे कुल में हुआ, लेकिन दुर्भाग्य से वह विधवा हो गई और अपने मायके वापस आ गई.

एक रात, विधवा बेटी के पूरे शरीर में कीड़े लग गए. अपनी बेटी की यह हालत देखकर ब्राह्मण दंपति बहुत दुखी हुए. तब ब्राह्मण उत्तंक ने ध्यान लगाकर देखा कि उनकी बेटी को यह कष्ट क्यों सहना पड़ रहा है. उन्हें पता चला कि उनकी बेटी ने पिछले जन्म में मासिक धर्म के दौरान पूजा के बर्तनों को छू लिया था और ऋषि पंचमी का व्रत भी नहीं किया था, जिसके दोष के कारण उसे यह पीड़ा हो रही है.

तब ऋषियों ने उन्हें इस दोष से मुक्ति का उपाय बताया. उन्होंने कहा कि अगर उनकी बेटी पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से ऋषि पंचमी का व्रत करे, तो उसे अपने पापों से मुक्ति मिल जाएगी और अगले जन्म में उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होगी. अपनी बेटी से यह व्रत करवाकर उन्होंने उसे इस कष्ट से मुक्ति दिलाई. तब से ही यह व्रत करने की परंपरा चली आ रही है.

कैसे किया जाता है व्रत?

इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं. पूजा की जगह पर हल्दी-कुमकुम से चौकोर मंडल बनाया जाता है और उस पर सप्तर्षियों (कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वसिष्ठ) की स्थापना की जाती है. इसके बाद उन्हें चंदन, फूल और अक्षत चढ़ाकर उनकी पूजा की जाती है और कथा सुनी जाती है. इस व्रत में अन्न नहीं खाया जाता, बल्कि केवल एक विशेष प्रकार के फल का सेवन किया जाता है. यह व्रत महिलाओं को न केवल दोषों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि उनके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति भी लाता है.