संसद में हाई-वोल्टेज ड्रामा विपक्षी दलों की इस बड़ी गलती से बच सकती है स्पीकर की कुर्सी, प्रस्ताव पर लटकी तलवार
News India Live, Digital Desk : केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच चल रहे सियासी टकराव के बीच लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) को उनके पद से हटाने का मामला अब तकनीकी पेंच में फंसता नजर आ रहा है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि विपक्षी दलों द्वारा दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में कुछ ऐसी तकनीकी खामियां पाई गई हैं, जिनके आधार पर इसे खारिज किया जा सकता है।
क्या है वह 'सिल्ली मिस्टेक' (The Technical Error)?
संसदीय नियमों के अनुसार, स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए कुछ विशेष प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य होता है। सूत्रों का कहना है कि:
नियम 179 का उल्लंघन: अविश्वास प्रस्ताव के लिए जो 14 दिनों का अनिवार्य नोटिस पीरियड और सदस्यों के हस्ताक्षर की प्रक्रिया होती है, उसमें विपक्षी दलों ने कुछ बुनियादी नियमों को नजरअंदाज कर दिया है।
नोटिस की भाषा और फॉर्मेट: बताया जा रहा है कि नोटिस का प्रारूप और उसे पेश करने का तरीका संसदीय नियमावली के अनुरूप नहीं है।
हस्ताक्षर में गड़बड़ी: कुछ सूत्रों का यह भी दावा है कि प्रस्ताव पर दिए गए समर्थन और सदस्यों की संख्या को लेकर भी स्पष्टता की कमी है।
सरकार और सचिवालय का रुख
लोकसभा सचिवालय अब इस नोटिस की बारीकी से जांच कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव नियमों की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है, तो स्पीकर इसे सदन में चर्चा के लिए अनुमति देने से इनकार कर सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसा होता है, तो यह विपक्ष के लिए एक बड़ी 'शर्मिंदगी' वाली स्थिति होगी।
विपक्ष की दलील
दूसरी ओर, विपक्षी खेमे का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक बहाना है ताकि सरकार चर्चा से बच सके। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर का झुकाव सत्ता पक्ष की ओर है, जिसे आधार बनाकर उन्होंने यह मोर्चा खोला है।