ITC के शेयर में 'धूम्रपान' से भारी गिरावट! सरकार के एक फैसले से निवेशकों के लाखों डूबे, जानें अब क्या करें?

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नए साल के पहले ही दिन, सिगरेट बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी ITC के शेयरधारकों को एक बहुत बड़ा झटका लगा। सरकार ने सिगरेट और तंबाकू पर GST के अलावा एक और नया टैक्स (एडिशनल एक्साइज ड्यूटी) लगाने का ऐलान कर दिया है, जो 1 फरवरी 2026 से लागू होगा।

सरकार की इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में ITC के शेयर में जैसे 'धूम्रपान' से धुआं-धुआं हो गया। 1 जनवरी को शेयर की कीमत एक ही दिन में लगभग 10% गिरकर ₹363.95 पर आ गई, जिससे निवेशकों के लाखों-करोड़ों रुपये डूब गए।

बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स ने क्यों घटाई ITC की रेटिंग?

सरकार के इस 'टैक्स बम' के बाद, शेयर बाजार की बड़ी-बड़ी ब्रोकरेज फर्म्स (जो कंपनियों पर रिसर्च करती हैं) जैसे मोतीलाल ओसवाल, नुवामा और जेपी मॉर्गन ने ITC के शेयर को लेकर अपनी राय बदल दी है।

  • पहले: वे निवेशकों को 'खरीदो, खरीदो' (Buy) की सलाह दे रहे थे।
  • अब: वे कह रहे हैं 'अभी रुको, देखो' (Hold/Neutral), यानी अभी खरीदने का समय नहीं है।

एक्सपर्ट्स क्यों हैं इतने डरे हुए?

  1. बढ़ोतरी उम्मीद से ज्यादा: नुवामा ने कहा, "हमें अंदाजा तो था कि सिगरेट पर टैक्स बढ़ेगा, लेकिन इतना ज्यादा बढ़ेगा, यह नहीं सोचा था। यह हैरान करने वाली बढ़ोतरी है।"
  2. सिगरेट की कीमतें बढ़ेंगी, बिक्री घटेगी: एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नए टैक्स के बोझ से बचने के लिए, ITC को हर सिगरेट की कीमत कम से कम 25% तक बढ़ानी होगी।
  3. मुनाफे पर असर: जब सिगरेट इतनी महंगी हो जाएगी, तो लोग इसे कम खरीदेंगे, जिससे ITC की सिगरेट की बिक्री (वॉल्यूम) और मुनाफा (EBITDA), दोनों घटेंगे।

इसी डर से ब्रोकरेज फर्म्स ने ITC के शेयर का प्राइस टारगेट भी घटा दिया है:

  • नुवामा: ₹534 से घटाकर ₹415 कर दिया।
  • मोतीलाल ओसवाल: घटाकर ₹400 कर दिया।
  • जेपी मॉर्गन: ₹475 से घटाकर ₹375 कर दिया।

तो अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?
जेपी मॉर्गन का मानना है कि इस भारी टैक्स बढ़ोतरी के बाद, अगले 6 से 9 महीनों तक ITC के शेयर का ऊपर जाना बहुत मुश्किल है। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि अभी इस शेयर में नया निवेश करने से बचें और 'Wait and Watch' की रणनीति अपनाएं।

हालांकि, UBS जैसी कुछ फर्म्स अभी भी positive हैं और उन्होंने 'बाय' रेटिंग बनाए रखी है, लेकिन उन्होंने भी अपना प्राइस टारगेट ₹490 से घटाकर ₹430 कर दिया है।

यह मामला दिखाता है कि कैसे सरकार का एक फैसला, किसी कंपनी की किस्मत और लाखों निवेशकों के पैसे पर सीधा असर डाल सकता है।