Healthcare crisis Dhanbad : जब मरीज़ों के भगवान ही हो गए लाचार, जानिए धनबाद के सबसे बड़े अस्पताल में क्यों लगा है ताला
News India Live, Digital Desk: सोचिए, आप किसी बीमार को लेकर बड़ी उम्मीद से शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पहुँचें और वहाँ आपको पता चले कि आज डॉक्टर देखेंगे ही नहीं, क्योंकि वे हड़ताल पर हैं। कुछ ऐसा ही हाल है इन दिनों झारखंड की कोयला नगरी धनबाद का, जहाँ के सबसे बड़े अस्पताल, शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) में स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ गई हैं। मरीज़ परेशान हैं और डॉक्टर गुस्से में हैं।
आखिर क्यों काम बंद करने पर मजबूर हुए डॉक्टर?
यह हड़ताल बिना किसी वजह के नहीं हो रही है। इसके पीछे एक दुखद और डरावनी घटना है। दरअसल, कुछ दिन पहले अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज़ की मौत हो गई थी। इस पर मरीज़ के गुस्साए परिजनों ने सारा दोष वहां ड्यूटी पर तैनात एक जूनियर डॉक्टर पर मढ़ दिया और उनके साथ बुरी तरह से मारपीट की।
यह घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि उनके साथ इस तरह की हिंसा और दुर्व्यवहार की घटनाएं आम हो गई हैं। वे अपनी जान जोखिम में डालकर मरीज़ों की सेवा करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें सुरक्षा तक नहीं मिलती। इसी नाइंसाफी के खिलाफ और एक सुरक्षित माहौल की मांग को लेकर अस्पताल के सभी जूनियर डॉक्टरों ने काम बंद करने का फैसला लिया है।
किस पर पड़ रहा है सबसे ज़्यादा असर?
इस हड़ताल का सबसे बुरा असर उन हज़ारों गरीब और लाचार मरीज़ों पर पड़ रहा है, जो इलाज के लिए पूरी तरह से इसी सरकारी अस्पताल पर निर्भर हैं। अस्पताल का ओपीडी विभाग, जहाँ रोज़ सैकड़ों मरीज़ दिखाने आते हैं, पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। दूर-दराज़ के गाँवों से आए लोग अस्पताल के बाहर परेशान बैठे हैं, उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे कहाँ जाएँ।
हालांकि, डॉक्टरों ने इंसानियत दिखाते हुए इमरजेंसी सेवाओं को চালু रखा है ताकि गंभीर मरीज़ों की जान बचाई जा सके, लेकिन सामान्य बीमारियों के लिए इलाज लगभग बंद हो चुका है।
क्या है डॉक्टरों की मांग?
डॉक्टरों की मांगें सीधी और साफ़ हैं - उन्हें काम करने के लिए एक सुरक्षित माहौल चाहिए। वे चाहते हैं कि उनके साथ मारपीट करने वाले आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए अस्पताल में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए जाएं।
एक तरफ डॉक्टरों की सुरक्षा का जायज़ सवाल है, तो दूसरी तरफ हज़ारों मरीज़ों की उम्मीदें हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को कैसे सुलझाता और अस्पताल में इलाज कब दोबारा शुरू हो पाता ۔