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कजिन मैरिज पर सबसे बड़ा वैज्ञानिक खुलासा: क्यों पाकिस्तान में तेजी से गायब हो रहे हैं इंसानी जीन?

दुनियाभर के कई देशों और संस्कृतियों में कजिन मैरिज (चचेरे, ममेरे, फुफेरे भाई-बहनों के बीच शादी) का चलन काफी पुराना है। खासकर मुस्लिम देशों में सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर इसे बेहद सामान्य और सही माना जाता है। वर्ल्ड पापुलेशन रिव्यू (World Population Review) के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में कजिन मैरिज की दर दुनिया में सबसे ज्यादा है। हालांकि, सामाजिक रूप से स्वीकार्य होने के बावजूद, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस तरह की शादियां आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रही हैं। हालिया साइंटिफिक रिसर्च में यह चेतावनी दी गई है कि कजिन मैरिज के कारण बच्चों में गंभीर जेनेटिक डिसऑर्डर (आनुवंशिक विकार) और कई जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

क्या है 'ह्यूमन नॉकआउट', जिसने वैज्ञानिकों को चौंकाया?

मशहूर विज्ञान पत्रिका 'नेचर' (Nature) में प्रकाशित एक बेहद चौंकाने वाली स्टडी के अनुसार, पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर 'ह्यूमन नॉकआउट' (Human Knockout) की स्थिति देखी जा रही है। रिसर्च में शामिल लगभग 34,000 लोगों में यह दुर्लभ कंडीशन पाई गई है। ह्यूमन नॉकआउट एक ऐसी आनुवंशिक स्थिति है, जिसमें इंसान के शरीर में मौजूद कम से कम एक जीन या तो पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है (स्विच ऑफ हो जाता है) या फिर वह शरीर से हमेशा के लिए गायब हो जाता है।

कजिन मैरिज से कैसे गायब हो जाते हैं शरीर के जरूरी जीन?

जीव विज्ञान के अनुसार, हर इंसान के शरीर में प्रत्येक जीन की दो कॉपी होती हैं—एक कॉपी माता से और दूसरी पिता से मिलती है। जब आपस में करीबी खून के रिश्ते या कजिन के बीच शादी होती है, तो माता और पिता दोनों का पारिवारिक डीएनए (DNA) एक जैसा होने के कारण बच्चों में दोनों तरफ से एक जैसा ही म्यूटेशन (आनुवंशिक बदलाव) ट्रांसफर हो जाता है। इस म्यूटेशन के टकराव से बच्चे के शरीर में वह विशेष जीन पूरी तरह से नष्ट या गायब हो जाता है। पाकिस्तान जीनोम रिसोर्स में शामिल हर पांच में से एक इंसान में कम से कम एक जीन पूरी तरह गायब पाया गया है, और पूरी रिसर्च के दौरान लगभग 6500 जीन 'स्विच ऑफ' मिले हैं।

चूहों पर नहीं, अब इंसानी जीन पर होगी रिसर्च; दवा उद्योग में आएगा बड़ा बदलाव

इस ऐतिहासिक जीनोमिक अध्ययन में दक्षिण एशियाई देशों के करीब 1,73,303 जीनोम का बारीकी से आकलन किया गया है। अब तक किसी भी नई दवा या इलाज का परीक्षण (Medical Trial) इंसानों से पहले चूहों पर किया जाता था। लेकिन वैज्ञानिक कई बार इस बात से परेशान रहते थे कि चूहों और इंसानों के जीन पूरी तरह अलग तरीके से काम करते हैं, जिससे चूहों पर सफल रही दवाएं इंसानों पर बेअसर साबित हो जाती थीं और करोड़ों डॉलर व बरसों की मेहनत बर्बाद हो जाती थी। अब पाकिस्तान में मिले इन 'ह्यूमन नॉकआउट्स' की मदद से वैज्ञानिक सीधे यह पता लगा सकेंगे कि किसी खास जीन के गायब होने से इंसानी शरीर और सेहत पर क्या सीधा असर पड़ता है, जिससे कई असाध्य बीमारियों के सटीक इलाज और नई दवाएं बनाने में एक बहुत बड़ा क्लू (सुराग) मिल गया है।

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