अत्यधिक दुबलेपन से खो रहा है आत्मविश्वास तो खान-पान में लाएं ये बुनियादी बदलाव, शरीर बनेगा सुडौल

अत्यधिक दुबलेपन से खो रहा है आत्मविश्वास तो खान-पान में लाएं ये बुनियादी बदलाव, शरीर बनेगा सुडौल

आज के दौर में जहां एक बड़ा वर्ग अपने बढ़ते मोटापे और अतिरिक्त चर्बी को घटाने के लिए संघर्ष कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ऐसे लोगों की भी एक बड़ी तादाद है जो अपने अत्यधिक दुबले-पतले शरीर और अंडरवेट होने की समस्या से जूझ रहे हैं। जब किसी व्यक्ति का शरीर इतना कमजोर हो जाता है कि पसलियां और हड्डियां बाहर से साफ दिखने लगती हैं, पसंदीदा साइज के कपड़े शरीर पर लटकते नजर आते हैं और जरा सी मेहनत करने पर थकान महसूस होने लगती है, तो यह स्थिति व्यक्ति के आत्मविश्वास को बुरी तरह प्रभावित करती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर का असामान्य रूप से दुबला होना केवल सुंदरता से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि शरीर को उसकी दैनिक आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पोषण, आवश्यक विटामिन्स, खनिज और ऊर्जा नहीं मिल पा रही है। पोषक तत्वों की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ने लगती है, जिससे मौसमी बीमारियां और संक्रमण शरीर को जल्दी अपनी चपेट में ले लेते हैं।

नोएडा स्थित डाइट मंत्रा क्लीनिक की जानी-मानी क्लिनिकल डायटीशियन कामिनी कुमारी इस स्थिति पर महत्वपूर्ण चिकित्सकीय सलाह देते हुए बताती हैं कि बहुत से लोग वजन बढ़ाने के चक्कर में बाजार में बिकने वाले केमिकल युक्त मास गेनर, हानिकारक स्टेरॉयड या अप्राकृतिक सप्लीमेंट्स का सहारा लेने लगते हैं, जो आगे चलकर लिवर और किडनी को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं कुछ लोग अंधाधुंध जंक फूड, तला-भुना और मीठा खाना शुरू कर देते हैं, जिससे वजन तो नहीं बढ़ता बल्कि पेट के आसपास अस्वस्थ चर्बी जमने लगती है और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। डायटीशियन स्पष्ट करती हैं कि सही और स्थायी वजन बढ़ाने का अर्थ सिर्फ पेट भरना या अधिक मात्रा में भोजन करना नहीं है। इसके लिए एक वैज्ञानिक 'कैलोरी सरप्लस' (Calorie Surplus) दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है, जिसमें शरीर जितनी ऊर्जा रोज खर्च करता है, उससे लगभग 300 से 500 कैलोरी अधिक, संतुलित प्रोटीन, कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और हेल्दी फैट्स के रूप में आहार के जरिए दी जाती है। यदि आप भी हड्डियों के ढांचे जैसा दिखने वाले शरीर से छुटकारा पाकर स्वस्थ तरीके से मसल्स मास बढ़ाना चाहते हैं, तो अपनी रोजमर्रा की थाली में इन पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को तुरंत शामिल करें।

केला और फुल क्रीम दूध का क्लासिक कॉम्बिनेशन: ऊर्जा और मांसपेशियों के विकास का सबसे असरदार फॉर्मूला

पारंपरिक भारतीय आहार और खेल पोषण में केला और दूध का संयोजन हमेशा से वजन बढ़ाने और शारीरिक बल संवर्धन का सबसे अचूक उपाय माना गया है। डायटीशियन कामिनी कुमारी के मुताबिक जब भी प्राकृतिक तरीके से शरीर का द्रव्यमान बढ़ाने की बात आती है, तो केले का स्थान सबसे ऊपर रहता है। केला एक ऐसा सुपाच्य फल है जो तुरंत पचने वाले प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट, फ्रुक्टोज और भारी मात्रा में कैलोरी का प्राकृतिक भंडार है। इसके साथ ही इसमें मौजूद पोटेशियम मांसपेशियों के संकुचन को नियंत्रित करता है और वर्कआउट के दौरान होने वाली ऐंठन से बचाव करता है। जब केले का सेवन फुल क्रीम यानी मलाईदार दूध के साथ किया जाता है, तो यह शरीर को उच्च जैविक मूल्य (High Biological Value) वाला प्रोटीन और स्वस्थ वसा प्रदान करता है।

वजन तेजी से बढ़ाने के इच्छुक व्यक्तियों को सलाह दी जाती है कि वे रोजाना सुबह के नाश्ते में या शाम को हल्का व्यायाम करने के तुरंत बाद 2 से 3 पके हुए केलों को एक बड़े गिलास गुनगुने फुल क्रीम दूध के साथ लें। यदि आप इसे और अधिक पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो मिक्सर में 2 केले, एक गिलास गाढ़ा दूध, एक चम्मच शहद और थोड़ा सा इलायची पाउडर मिलाकर हाई-कैलोरी बनाना शेक तैयार कर सकते हैं। यह शेक शरीर के मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करता है, पाचन तंत्र पर भारी दबाव डाले बिना शरीर को तुरंत लगभग 400 से 500 अतिरिक्त कैलोरी पहुंचाता है और लगातार एक महीने तक इसका सेवन करने से शरीर में भरा हुआ सुडौलपन साफ नजर आने लगता है।

ड्राई फ्रूट्स और नट्स को बनाएं दैनिक दिनचर्या का हिस्सा: सूक्ष्म पोषक तत्वों और हेल्दी फैट्स का खजाना

कमजोर और दुबले शरीर को पोषण देने के लिए मेवे और सूखे मेवे (Nuts and Dry Fruits) सबसे सघन ऊर्जा स्रोत माने जाते हैं। बादाम, काजू, अखरोट, किशमिश और अंजीर जैसे सूखे मेवे देखने में भले ही छोटे लगते हों, लेकिन इनमें मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स, पादप-आधारित प्रोटीन, डायटरी फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। अक्सर दुबले लोगों की भूख बहुत जल्दी मिट जाती है और वे एक बार में भारी भोजन नहीं खा पाते। ऐसे लोगों के लिए नट्स एक वरदान की तरह काम करते हैं, क्योंकि मुट्ठी भर ड्राई फ्रूट्स खाकर भी शरीर को बिना पेट भारी किए सैकड़ों कैलोरी और ओमेगा-3 फैटी एसिड आसानी से मिल जाते हैं।

डायटीशियन के अनुसार, वजन बढ़ाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए 5 से 6 बादाम, 2 सूखे अंजीर और 10 से 12 किशमिश को रात के समय साफ पानी में भिगोकर रख देना चाहिए। अगली सुबह उठकर खाली पेट इन भीगे हुए नट्स का सेवन करने से इनके पोषक तत्व शरीर में बहुत तेजी से अवशोषित होते हैं। अंजीर और किशमिश में मौजूद प्राकृतिक शर्करा और आयरन खून में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाते हैं, जिससे भूख में प्राकृतिक रूप से सुधार होता है। इसके अलावा दिन के समय जब भी हल्की भूख महसूस हो, तब भुने हुए काजू और अखरोट की एक मुट्ठी स्नैक के रूप में खाने से शरीर को स्वस्थ वसा मिलती है, जो कमजोर अंगों को अंदर से पोषण देकर त्वचा की चमक और मांसपेशियों के घनत्व को बढ़ाती है।

पीनट बटर और हाई-प्रोटीन फूड्स: कमजोर हड्डियों को मजबूती देकर मजबूत मसल्स बनाने का सटीक तरीका

यदि आप चाहते हैं कि आपका वजन केवल चर्बी के रूप में न बढ़े बल्कि आपकी मांसपेशियां यानी लीन मसल्स मजबूत बनें, तो आपको अपने आहार में हाई-प्रोटीन तत्वों का अनुपात बढ़ाना होगा। इस दिशा में पीनट बटर यानी मूंगफली का मक्खन एक बेहद सस्ता, सुलभ और अत्यंत प्रभावी विकल्प है। पीनट बटर में उच्च मात्रा में प्रोटीन, स्वस्थ कैलोरी और दिल के लिए फायदेमंद असंतृप्त वसा पाई जाती है। प्रतिदिन दो चम्मच शुद्ध पीनट बटर को होल व्हीट ब्रेड, पारंपरिक गेहूं की रोटी या फलों की स्मूदी के साथ फैलाकर खाने से शरीर को लगभग 200 अतिरिक्त कैलोरी और 8 ग्राम शुद्ध प्रोटीन सरलता से मिल जाता है।

इसके साथ ही मांसाहारी लोगों के लिए उबले हुए अंडे, चिकन और ताजी मछली प्रोटीन के सर्वोत्तम स्रोत हैं। अंडे की जर्दी (पीला भाग) में हेल्दी फैट और विटामिन्स होते हैं, जबकि सफेद हिस्से में शुद्ध एल्ब्यूमिन प्रोटीन होता है। शाकाहारी लोगों के लिए पनीर, टोफू, सोया चंक्स, अंकुरित मूंग, राजमा और गाढ़ी दालें मांसपेशियों के पुनर्निर्माण के लिए अनिवार्य मानी जाती हैं। डायटीशियन स्पष्ट करती हैं कि जब शरीर को भोजन से पर्याप्त प्रोटीन मिलता है, तो कमजोर पड़ चुकी मांसपेशियों के तंतु रिपेयर होने लगते हैं, जिससे हड्डियों का ढांचा ढक जाता है और शरीर भरा-भरा व सुगठित दिखने लगता है।

फुल क्रीम दूध, शुद्ध घी और ताजा पनीर: भारतीय रसोई के पारंपरिक आहार से पाएं स्थायी शारीरिक सौष्ठव

भारतीय पारंपरिक खान-पान में डेयरी उत्पादों का महत्व केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं, बल्कि संपूर्ण शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। फुल क्रीम दूध, घर का बना ताजा पनीर और शुद्ध देसी गाय का घी वे तत्व हैं जो शरीर के सातों धातुओं (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्र) को पुष्ट करते हैं। डेयरी उत्पादों में मौजूद कैसिइन और व्हे प्रोटीन शरीर में धीरे-धीरे पचकर मांसपेशियों को लगातार पोषण देते रहते हैं, जबकि इनमें मौजूद कैल्शियम और फास्फोरस कमजोर और पतली हड्डियों के घनत्व को बढ़ाकर उन्हें अंदर से मजबूती प्रदान करते हैं।

वजन बढ़ाने की डाइट में रोजाना दोपहर और रात के भोजन में कम से कम 50 से 100 ग्राम कच्चे पनीर का सेवन करना बेहद लाभकारी सिद्ध होता है। इसके अलावा दोपहर के भोजन में दाल और गर्म रोटियों पर एक से दो चम्मच शुद्ध देसी घी लगाकर खाने से आंतों का स्वास्थ्य बेहतर होता है और शरीर में वसा में घुलनशील विटामिन्स (जैसे विटामिन ए, डी, ई और के) का अवशोषण सुचारू रूप से होता है। रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने फुल क्रीम दूध में थोड़ी सी हल्दी और चुटकी भर अश्वगंधा पाउडर मिलाकर पीने से गहरी और आरामदायक नींद आती है, तनाव दूर होता है और मांसपेशियों की रिकवरी तेज होती है। सही पोषण के साथ-साथ रोजाना 30 मिनट का हल्का शक्ति प्रशिक्षण (स्ट्रेंथ ट्रेनिंग) और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से कुछ ही हफ्तों में वजन में स्वस्थ और सकारात्मक बदलाव दिखने लगते हैं