दिवाली की सफाई के दौरान छींक और आंखों में जलन को न करें नजरअंदाज

दिवाली की सफाई के दौरान छींक और आंखों में जलन को न करें नजरअंदाज

दीपावली का पावन पर्व नजदीक आते ही हर घर में साफ-सफाई का दौर शुरू हो जाता है। रोशनी के इस महापर्व पर मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए कोना-कोना चमकाया जाता है, दीवारों की पुताई होती है और महीनों से बंद पड़े स्टोर रूम, जाले और कबाड़ को खंगाला जाता है। लेकिन इस उत्साह और उमंग के बीच अक्सर लोग अपनी सेहत के साथ होने वाली अनजाने खिलवाड़ को नजरअंदाज कर देते हैं। साफ-सफाई के दौरान उठने वाली धूल, फफूंद (Mold), मकड़ी के जाले और केमिकल युक्त क्लीनर्स के संपर्क में आने से कई लोगों को लगातार छींके आने, नाक बहने, आंखों में चुभन, खुजली और सांस लेने में हल्की तकलीफ जैसी समस्याएं होने लगती हैं। यदि आप भी सफाई के बाद इन लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो इन्हें सामान्य धूल-मिट्टी मानकर टालने की भूल बिल्कुल न करें, क्योंकि यह आपके शरीर में छिपे खतरनाक एलर्जेन और एलर्जी के गंभीर शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

#1 महीनों की धूल और फफूंद में छिपे होते हैं अदृश्य एलर्जेन

जब हम महीनों या साल भर से बंद पड़े कमरों, अलमारियों या स्टोर रूम की सफाई करते हैं, तो हवा में ऐसी सूक्ष्म धूल उड़ने लगती है जिसे सामान्य आंखों से देख पाना असंभव होता है। इस धूल में हाउस डस्ट माइट्स (House Dust Mites), फफूंद के बी spores (Mold Spores), कॉकरोच के अवशेष और परागकण जैसे सूक्ष्म एलर्जेन प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं। जैसे ही हम सांस लेते हैं, ये एलर्जेन हमारे श्वसन तंत्र के जरिए फेफड़ों और नाक की झिल्ली तक पहुंच जाते हैं। इसके प्रतिक्रियास्वरूप हमारा इम्यून सिस्टम सक्रिय हो जाता है और हिस्टामाइन नामक रसायन का स्राव करने लगता है, जिसके कारण छींकें आने, नाक बंद होने, गले में खराश और आंखों से पानी बहने जैसी समस्याएं अचानक शुरू हो जाती हैं।

#1 आंखों में जलन, लालिमा और स्किन एलर्जी का खतरा

साफ-सफाई के दौरान केवल श्वसन तंत्र ही नहीं, बल्कि हमारी आंखें और त्वचा भी इन हानिकारक एलर्जेन के सीधे संपर्क में आती हैं। पुरानी किताबों, गद्दे-कंबल और जालों को झाड़ते समय उड़ने वाले कण जब आंखों में जाते हैं, तो कंजंक्टिवाइटिस या एलर्जिक रिएक्शन के कारण आंखों में तेज जलन, खुजली, सूजन और लालिमा की शिकायत पैदा हो जाती है। इसके अलावा, जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील (Sensitive) होती है, उन्हें दीवारों की पुरानी पपड़ी खुरचते समय या मजबूत फिनाइल और एसिड आधारित क्लीनिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते समय हाथों और चेहरे पर रैशेज, खुजली और चकत्ते पड़ने का सामना करना पड़ता है।

#1 अस्थमा और सांस के मरीजों के लिए हो सकता है जानलेवा

सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए भले ही यह एलर्जी कुछ घंटों या दिनों की परेशानी हो, लेकिन जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी सांस की गंभीर बीमारियां हैं, उनके लिए दिवाली की सफाई एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन सकती है। धूल और फफूंद के संपर्क में आने से अस्थमा रोगियों की सांस की नलियां अचानक सिकुड़ जाती हैं, जिससे उन्हें सांस लेने में भारी कठिनाई, सीने में तेज जकड़न और गंभीर अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए दमा से पीड़ित मरीजों को सफाई के दौरान सीधे तौर पर धूल-मिट्टी के संपर्क में आने से पूरी तरह बचना चाहिए।

#1 सफाई के दौरान इन बातों का रखें खास ख्याल, अपनाएं ये अचूक बचाव के उपाय

यदि आप दिवाली की सफाई पूरी सुरक्षा और सावधानी के साथ करना चाहते हैं, तो कुछ आसान उपायों को अपनाकर इन एलर्जी से आसानी से बचा जा सकता है:

  • मास्क और दस्ताने का अनिवार्य उपयोग: सफाई करते समय हमेशा अच्छी क्वालिटी का एन-95 या सर्जिकल मास्क पहनें ताकि धूल के कण सीधे नाक और मुंह के रास्ते अंदर न जा सकें। हाथों में रबर के दस्ताने (Gloves) पहनें ताकि केमिकल और फंगस से त्वचा सुरक्षित रहे।

  • हवा के वेंटिलेशन का रखें ध्यान: सफाई करते समय घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां पूरी तरह खुली रखें ताकि उड़ने वाली धूल एक जगह जमा होने की बजाय बाहर निकलती रहे।

  • गीले कपड़े से सफाई (Wet Mopping): सूखे झाड़ू या फेदर डस्टर से धूल झाड़ने के बजाय हमेशा गीले कपड़े या पोछे का इस्तेमाल करें। इससे धूल हवा में उड़ने की बजाय कपड़े पर ही चिपक जाती है।

  • हेपा फिल्टर वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल: यदि संभव हो तो सफाई के लिए वैक्यूम क्लीनर का प्रयोग करें, जिसमें HEPA फिल्टर लगा हो जो बारीक से बारीक एलर्जेन को भी खींच लेता है।

  • सफाई के बाद तुरंत स्नान और कपड़े बदलना: घर की डीप क्लीनिंग समाप्त करने के तुरंत बाद स्नान करें और सफाई में पहने गए कपड़ों को धोकर अलग रख दें ताकि शरीर पर चिपके एलर्जेन पूरी तरह साफ हो जाएं।

#1 लक्षणों को नजरअंदाज न करें, जरूरत पड़ने पर लें डॉक्टर की सलाह

त्योहारों की चमक-धमक और उत्साह के बीच अपनी सेहत से किसी भी प्रकार का समझौता करना भारी पड़ सकता है। यदि साफ-सफाई के बाद आपको लगातार छींके आ रही हैं, सांस फूल रही है या आंखों की जलन घरेलू उपायों से ठीक नहीं हो रही है, तो तुरंत किसी योग्य चिकित्सक या ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से परामर्श लें। डॉक्टर की सलाह से एंटीहिस्टामाइन दवाइयां या आई ड्रॉप्स का समय पर उपयोग करके आप किसी भी बड़ी स्वास्थ्य जटिलता से बच सकते हैं। सावधानी और सतर्कता के साथ अपनी दिवाली की तैयारियां करें ताकि आपका परिवार पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित रहकर इस पावन पर्व की खुशियों का आनंद ले सके।