अमेरिकी संसद में इतिहास रचने वाले पहले मुस्लिम सीनेटर अब्दुल अल-सईद और उनकी भारतीय मूल की पत्नी की दिलचस्प लव स्टोरी

अमेरिकी संसद में इतिहास रचने वाले पहले मुस्लिम सीनेटर अब्दुल अल-सईद और उनकी भारतीय मूल की पत्नी की दिलचस्प लव स्टोरी

वैश्विक राजनीति, अमेरिका के चुनावी गलियारों और सांस्कृतिक सरहदों को पार करने वाली एक बेहद खूबसूरत, दिलचस्प और दिल को छू लेने वाली प्रेम कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर पूरी तरह से छाई हुई है। अमेरिका में हाल ही में संपन्न हुए राजनीतिक घटनाक्रमों और मिडटर्म चुनावों के बीच डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अब्दुल अल-सईद (Abdul El-Sayed) ने अमेरिकी संसद में इतिहास रचते हुए एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। वे अमेरिकी संसद के इतिहास में पहले मुस्लिम सीनेटर (Senator) बनने का गौरव प्राप्त कर चुके हैं। अपनी इस ऐतिहासिक और शानदार राजनीतिक जीत के जश्न के दौरान जब वे अपनी धर्मपत्नी डॉ. सारा जुककू (Dr. Sarah Jukku) के साथ नजर आए, तो पूरी दुनिया की निगाहें इस जोड़े पर टिक गईं। इस जीत के बाद से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अब्दुल अल-सईद का एक पुराना लेकिन बेहद मजेदार पॉडकास्ट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे अपनी भारतीय मूल की पत्नी के साथ हुई शादी और मिस्र में रहने वाले अपने रिश्तेदारों की हैरान करने वाली प्रतिक्रियाओं का खुलकर जिक्र कर रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि अमेरिकी राजनीति के इस नए सितारे और उनकी भारतीय जड़ों से जुड़ी इस अनूठी कहानी के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है।

मिस्र से ताल्लुक रखने वाले परिवार में हुई शादी पर जब चाचा ने जताई थी हैरानी

अब्दुल अल-सईद मिस्र से अमेरिका आए आप्रवासियों के बेटे हैं, जिनका परिवार पारंपरिक रूप से अपनी सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ा रहा है। वायरल हो रहे पॉडकास्ट और पुराने साक्षात्कारों में अब्दुल अल-सईद ने एक बेहद दिलचस्प और हास्य से भरपूर किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने डॉ. सारा जुककू के साथ जीवन बिताने का फैसला किया और दोनों ने विवाह किया, तो मिस्र में रहने वाले उनके एक चाचा को इस बात पर गहरी हैरानी हुई थी।

मिस्र के उन चाचा ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए अब्दुल अल-सईद से कहा था, "मिस्र में कुल 8 करोड़ (80 मिलियन) से अधिक लोग रहते हैं, और फिर भी तुमने जाकर भारत की एक महिला से शादी कर ली?" परिवार के बुजुर्गों की इस प्रतिक्रिया पर अब्दुल ने जिस हाजिरजवाबी और मजाकिया अंदाज में अपने चाचा को जवाब दिया, उसने हर किसी का दिल जीत लिया। अल-सईद ने अपने चाचा को सांख्यिकी (Statistics) का हवाला देते हुए बड़े ही अनूठे अंदाज में समझाया कि दुनिया भर में एक अरब से अधिक भारतीय आबादी निवास करती है, इसलिए संभावनाओं के गणित के लिहाज से यह बेहद स्वाभाविक बात थी कि उनका जीवनसाथी भारतीय मूल से हो सकता था।

डॉ. सारा जुककू का कर्नाटक के भटकल से है गहरा और ऐतिहासिक नाता

अब्दुल अल-सईद की जीवनसंगिनी डॉ. सारा जुककू का परिवार मूल रूप से भारत के दक्षिण राज्य कर्नाटक (Karnataka) के एक बेहद खूबसूरत तटीय और ऐतिहासिक शहर भटकल (Bhatkal) से ताल्लुक रखता है। सारा का परिवार केवल सांस्कृतिक रूप से ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक और शैक्षणिक रूप से भी एक बेहद प्रतिष्ठित पृष्ठभूमि से आता है।

डॉ. सारा के परिवार का इतिहास समाज सेवा और राजनीति में काफी समृद्ध रहा है। उनके दादा, जुककू शम्सुद्दीन (Jukku Shamsuddin), अपने समय के बहुत ही प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। वे मैसूर राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.डी. जत्ती के कार्यकाल के दौरान राज्य के उप-वित्त मंत्री (Deputy Finance Minister) के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें भटकल क्षेत्र का पहला योग्य वकील (Advocate) होने का भी गौरव प्राप्त है।

पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सारा के पिता, डॉ. तय्यब जुककू, चिकित्सा जगत में एक जाने-माने नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ) हैं। उन्होंने भारत के प्रतिष्ठित शहर बेंगलुरु से अपनी मेडिकल की उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद अमेरिका का रुख किया था और वहीं पर बस गए। आज अब्दुल और सारा का यह परिवार अमेरिका की मुख्यधारा की राजनीति और समाज में अपनी अमिट छाप छोड़ रहा है।

"शायद अब मैं अरब से ज्यादा भारतीय हो गया हूं": अब्दुल अल-सईद का मजाकिया अंदाज

अपनी पत्नी के भारतीय परिवार, वहां के खान-पान, संस्कारों और सांस्कृतिक विविधता के साथ अपने जुड़ाव को अब्दुल अल-सईद हमेशा बहुत ही गर्मजोशी और प्यार के साथ याद करते हैं। विभिन्न साक्षात्कारों के दौरान उन्होंने कई बार खुलकर यह स्वीकार किया है कि भारतीय संस्कृति की आत्मीयता ने उन्हें बहुत गहराई से प्रभावित किया है।

एक पुराने और चर्चित इंटरव्यू में मजाक करते हुए अब्दुल अल-सईद ने यहां तक कह दिया था कि भारतीय परिवार के साथ लगभग दो दशकों का लंबा समय बिताने और वैवाहिक बंधन में बंधने के बाद, अब शायद वे जन्मजात अरबी होने से ज्यादा 'भारतीय' बन चुके हैं। उनकी इस सादगी और खुलेपन को लोग सोशल मीडिया पर खूब पसंद कर रहे हैं। इतना ही नहीं, हाल ही में एक चुनावी रैली के दौरान डॉ. सारा जुककू ने भी अपने चिर-परिचित मजाकिया और जिंदादिल अंदाज से वहां मौजूद सभी लोगों का दिल जीत लिया था, जब उन्होंने हंसते हुए कहा था कि घर में कोई उन्हें कुछ नहीं बताता, सिवाय उनके। इस खूबसूरत दंपत्ति की दो प्यारी बेटियां भी हैं, जिनके नाम एमिली और सेरीन हैं।

अमेरिकी राजनीति में नया इतिहास और सांस्कृतिक विविधता की मिसाल

अब्दुल अल-सईद का अमेरिकी संसद में पहले मुस्लिम सीनेटर के रूप में चुना जाना केवल एक राजनीतिक जीत नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि आधुनिक लोकतंत्र में विविधता और बहुसांस्कृतिक पृष्ठभूमि किस प्रकार देश को आगे बढ़ाने में मदद करती है। मिस्र की माटी से ताल्लुक रखने वाले अब्दुल और कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति में पली-बढ़ी डॉ. सारा की यह जोड़ी आज दुनिया भर के युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिस प्रकार अब्दुल अल-सईद ने अपनी राजनीतिक यात्रा में अपनी जड़ों और अपनी जीवनसंगिनी के सांस्कृतिक मूल्यों का सम्मान करते हुए एक नई ऊंचाई हासिल की है, वह अमेरिकी संसद की कार्यप्रणाली में विविधता की एक बेहतरीन मिसाल पेश करेगा। सोशल मीडिया पर उनके पुराने बयानों और इस प्रेम कहानी के वायरल होने से यह साबित हो जाता है कि सरहदें भले ही दो देशों को अलग करती हों, लेकिन सच्चा प्यार और आपसी समझ सभी दूरियों को मिटाकर दिलों को जोड़ देता है।